जिले के सरांवा गांव स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सहेली झलकारी बाई का 187 वां जन्मदिन मनाया। शहीद स्मारक पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि भारत की स्वाधीनता के लिए 1857 में हुए संग्राम में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी कन्धे से कन्धा मिलाकर सहयोग दिया था। ऐसी ही एक वीरांगना थी झलकारी बाई। उनका जन्म 22 नवंबर 1830 को ग्राम भोजला जिला झांसी उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता मूलचन्द्र सेना में थे। घर में प्राय: सेना द्वारा लड़े गए युद्ध, सैन्य व्यूह और विजयों की चर्चा होती थी। उन्होंने कहा कि मूलचन्द्र ने बचपन से ही झलकारी को अस्त्र-शस्त्रों का संचालन सिखाया। इसके साथ ही पेड़ों पर चढ़ने, नदियों में तैरने और ऊँचाई से छलांग लगाने जैसे कार्यों में भी झलकारी पारंगत थी।
झलकारी का विवाह झांसी की सेना में तोपची पूरन कोरी से हुआ। जब झलकारी रानी लक्ष्मीबाई से आशीर्वाद लेने गई तो उन्होंने उसके सुगठित शरीर और शस्त्राभ्यास को देखकर उसे दुर्गा दल में भरती कर लिया। 1857 में अंग्रेजी सेना झांसी पर अधिकार करने के लिए किले में घुसने का प्रयास कर रही थी, तो झलकारी बाई शीघ्रता से रानी के महल में पहुँची और उन्हें दत्तक पुत्र सहित सुरक्षित किले से बाहर जाने में सहायता दी। वेश बदलकर रानी बाहर निकल गई तो दूसरी ओर रानी का वेश धारण कर झलकारी बाई अंग्रेजों पर टूट पड़ी। इस अवसर पर डा. धरम सिंह , मैनेजर पांडेय ,अनिरुद्ध सिंह ,मंजीत कौर मौजूद रहे ।