जौनपुर। जिले में गरीब तबके के कई पात्र लोगों सरकारी आवास के लिए ग्राम प्रधान से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक चक्कर काटने के बाद भी लाभ नहीं मिला वहीं दूसरी तरफ ऐसे अपात्र लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया गया है जिनके पास पहले से पक्का मकान और अन्य सुख संसाधन मौजूद हैं। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से की गई शिकायत के बाद जब बक्शा विकास खंड के करतिहां गांव में आवास के लाभार्थियों की जांच हुई तो आवास आवंटन में बड़े पैमाने पर की गई गड़बड़ी का खुलासा हुआ। ऐसे पांच अपात्र लाभार्थी पाए गए जिन्हें प्रधानमंत्री आवास की धनराशि की पहली किस्त के रूप में 40-40 हजार रुपये जारी किए गए हैं। खंड विकास अधिकारी फूलचंद्र यादव ने ऐसे अपात्रों से आवास की धनराशि की वसूली कराने का निर्देश ग्राम पंचायत अधिकारी को दिया है। मामले में जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र ने जिले के सभी विकास खंडों में आवास आवंटन में धांधली की जांच के निर्देश दिया है।
बक्शा विकास खंड के करतिहां गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पांच लाभार्थियों को आवास दिया गया था। करीब 1.34 लाख की लागत से बनने वाले आवास के लिए 40-40 हजार रुपये की पहली किस्त भी लाभार्थियों के खाते में भेज दी गई। लाभार्थियों ने खाते से पैसे निकालकर आवास का निर्माण भी शुरू करा दिया। इसी बीच आवास आवंटन में धांधली का आरोप लगाते हुए गांव के कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी शिकायती पत्र भेज दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर बक्शा के खंड विकास अधिकारी फूलचंद्र यादव ने सहायक विकास अधिकारी सांख्यिकी नवीन चंद्र श्रीवास्तव और सहायक विकास अधिकारी कोआपरेटिव अजय कुमार को जांच अधिकारी नामित किया। दोनों अधिकारियों ने गांव में जाकर लाभार्थियों की जांच की तो पता चला कि जिन सात लोगों को आवास का लाभ दिया गया है उनमें से पांच अपात्र हैं। गांव की अमीना खातून, मोगीना, नाज बानो, शायदा बानो और मो. सलीम के पास पहले से ही पक्का मकान हैं। इसके बाद भी इन्हें प्रधानमंत्री आवास का लाभ दे दिया गया है। दोनों अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट खंड विकास अधिकारी को सौंपी। खंड विकास अधिकारी फूलचंद्र यादव ने आवास का पैसा वापस कराने का आदेश ग्राम पंचायत अधिकारी को दिया है।
बक्शा विकास खंड के करतिहां गांव में अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ देने के मामले का खुलासा होने पर ब्लाक के अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल सरकारी आवास के लाभार्थियों के खाते में पैसे भेजने के पहले ही उनकी पात्रता की जांच करने का नियम है लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ या जानबूझ कर अपात्रों को आवास का लाभ दिया गया। अगर ऐसा भी नहीं है तो बिना जांच पड़ताल के ही आवास आवंटित कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ लाभार्थियों के खाते से धन वापस करने से बात नहीं बनेगी बल्कि जिन अधिकारियों की रिपोर्ट पर अपात्रों को आवास का आवंटन किया गया उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रधान मंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के खाते में तीन किस्त में धन भेजने का प्राविधान है। पहली किस्त में 40 हजार, दूसरी किस्त में 70 हजार और तीसरी किस्त में 10 हजार रुपये लाभार्थी के खाते में भेजे जाते हैं। मजदूरी के रूप में लगभग 14 हजार रुपये तक मनरेगा से भुगतान होता है। जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्रों को आवास आवंटन करने की और भी कई शिकायतें मिली हैं। सभी विकास खंडों में फिर से जांच कराई जाएगी।