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स्वायतता से उच्च शिक्षण संस्थानों में निखरेगी शिक्षा की गुणवता

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पूर्वांचल विश्वविद्यालय में संगोष्ठी का दीप जलाकर उद्घाटन करते राज्यपाल राम नाईक
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जौनपुर। उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता मिलने से ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बहुत सारे ऐसे संस्थान हैं जो स्वायत्तता के कारण बेहतर काम कर पा रहे हैं। ये बातें डालमिया कालेज मुंबई के प्राचार्य व शिक्षाविद् डॉ. एनएन पांडेय ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन दूसरे सत्र में कहीं।
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य डा. दीनानाथ सिंह ने कहा कि आज शिक्षा व्यवसाय का रूप ले चुका है। प्राचीन काल में शिक्षा प्रदान करने के प्रति जो भाव था वह समाप्त होता जा रहा है। आज शिक्षक की योग्यताएं नियामक संस्थाएं तय कर रही हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार न आना चिंताजनक है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. रंजना प्रकाश ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति में उद्योगों से बेहतर तालमेल बैठाने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि अगर हम अपने पाठ्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से नहीं तैयार कर पाएंगे तो हमारे छात्र उनमें अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को समय से नियुक्तियां करनी चाहिए। सरकार को पांच एक्सीलेंट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का चयन कर उन्हें वित्तीय सहायता देने चाहिए जिससे वह और बेहतर काम कर सकें। उन्होंने उच्च शिक्षा में नकल को रोकने के लिए तमाम उपाय बताए।
राज्यपाल राम नाईक के विश्वविद्यालय आगमन पर विश्वविद्यालय परिसर के अलावा एक किलोमीटर के दायरे में पुलिस फोर्स तैनात रही। तलाशी के बाद ही लोगों को संगोष्ठी भवन में प्रवेश दिया गया। यह बात अलग थी कि बड़ी संख्या में मोबाइल लेकर लोग संगोष्ठी हाल में पहुंच गए थे। राज्यपाल सुबह 9.50 पर विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे थे। करीब 11.50 बजे तक कार्यक्रम में शामिल थे। सबसे पहले उन्होंने गांधी वाटिका में महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण किया। सुरक्षा को लेकर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। मौके पर डीएम सर्वज्ञ राम मिश्र, एसपी केके चौधरी, एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा ने मंच पर राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी। यह सुनते ही राज्यपाल ने उन्हें यह कहते हुए टोक दिया कि चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में मंच पर राजनीतिक चर्चा नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम में आने से पहले मैंने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर यह जानकारी कर ली थी कि मुझे इस कार्यक्रम में जाना चाहिए अथवा नहीं।
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