मछलीशहर। प्रदूषित जल का उपयोग रोकने के उद्देश्य से गांवों में जल परीक्षण की योजना शासन की ओर चलाई तो गई है लेकिन स्थिति यह है कि पेयजल परीक्षण किट विकास खंड के कमरे में कबाड़ के बीच पड़ा है। इससे पानी के टीडीएस की जांच नहीं हो पा रही है। लोग प्रदूषित जल पीने को विवश हैं।
2014 में डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार और प्रदेश सरकार के सहयोग से पानी की जांच का कार्य निजी संगठन को सौंप दिया था।
प्रदेश के हर जिले में जिला सलाहकार एवं ब्लॉकों में जल प्रबंधन कोआर्डिनेटर की तैनाती ठेके पर हुई। 6 माह बाद इन्हें सेवा विस्तार दिया जाता रहा। इनके माध्यम से ही जल कह शुद्धता का परीक्षण किया जाना था। अप्रैल में जल परीक्षण किट ब्लाक पर उपलब्ध करा दी गई। कुछ ग्राम प्रधानों को किट देकर परीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। शेष किट ब्लाक परिसर स्थित एक जर्जर कमरे के बरामदे में बेकार पड़ी है। उधर, अशुद्ध पेयजल का उपयोग करने से लोग रोगों का शिकार हो रहे है। कोआर्डिनेटर संजय कुमार मौर्य का कहना है कि किट का वितरण कुछ गांवों में कराया गया था।