करंजाकला। दीक्षा ग्रहण करना शिक्षा का अंत नहीं है। यह शिक्षा का एक पड़ाव है। दीक्षा लेकर छात्र जीवन के अगले पड़ाव की तरफ बढ़ते हैं। ये बातें इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट कमेटी (आईएमसी) के चेयरमैन त्रिभुवन सिंह ने मंगलवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सिद्दीकपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और छात्रों के बीच गहरा संबंध होता है। शिक्षक को चाहिए की छात्रों को आगे ले जाने के लिए पूरी तरह से परिपक्व करें जिससे वह अपने जीवन में हर कठिनाई का सामना कर सके। शिक्षक छात्रों के भाग्य का निर्माता होता है। छात्रों को हमेशा अच्छे आचरण करना चाहिए। बेहतर आचरण ही छात्रों के विकास में नींव की ईंट साबित होते हैं। उन्होंने ने बताया कि नौकरी करने नहीं बल्कि दूसरे को नौकरी देने का कार्य करना चाहिए। प्रधानाचार्य शिवबालक राम वर्मा ने कहा कि हमारे संस्थान में 13 ट्रेडों का संचालन होता है। सभी ट्रेडों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधा कृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। छात्रों को प्रमाण पत्र और डिग्री प्रदान की गई। दीपनारायण, मुकेश यादव, राकेष कुमार, कुमारी मधु, असरफ खां, गगन, पवन कुमार, विक्रांत यादव, मनोज यादव, रमाकांत, संतोष कुमार, सुशील कुमार, विनय कुमार, हरेंद्र कुमार, राकेश कुमार प्रजापति, कुमारी पूजा, ममता यादव समेत 35 छात्रों को डिग्री और प्रमाण पत्र दिया गया। इस मौके पर सुनील कुशवाहा, एमए जमा, हरिश्चंद्र, अखिलेश सिंह, सभाजीत यादव, वीपी सिंह, पीएन यादव, विश्राम, मुस्ताक हुसैन, राजीव यादव आदि मौजूद रहे।