डा. क्षेम की जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित जिलाधिकारी
जौनपुर। डा. श्रीपाल सिंह क्षेम आशावादी कवि थे। उनकी कविताएं युवाओं में उत्साह का संचार करती हैं। उन्होंने राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं पर भी अपनी लेखनी चलाई है। ये बातें जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र ने शनिवार की शाम उत्सव मोटल में डा. श्री पाल सिंह क्षेम की जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन व मुशायरा कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि डा. क्षेम का काव्य छायावाद से प्रभावित है। उन्होंने अपनी रचनाओं में आंचलिक शब्दों का प्रयोग किया है। पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि हमें परिस्थितियों से घबराकर भागना नहीं चाहिए। डा. क्षेम की कविता जभी से जगे रे भाई तभी से सबेरा है... हमें ऐसा ही संदेश देती है। पूर्व मंत्री पारसनाथ यादव ने कहा कि डा.क्षेम मानवता के पुजारी थे। उनमें जाति-पांति या ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं था। सांसद रामचरित्र निषाद ने कहा कि डा. क्षेम ने समाज को उपयोगी संदेश दिए हैं। उनकी स्मृति को सजोए रखने के लिए उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंशू ,विधायक डा.हरेंद्र प्रताप सिंह, विधायक दिनेश चौधरी व महाराष्ट्र के उद्योगपति अशोक कुमार सिंह ने डा.क्षेम की प्रतिमा की स्थापना में सहयोग देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन टीडी डिग्री कालेज के प्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने किया। इसके बाद गीतकार भालचंद्र त्रिपाठी ने माई नेहिया के दियना जरावेलू....सुनाकर वातावरण भक्ति मय बना दिया। शशांक देव सिंह ने देखा के के कोइलिया बोलावत बा सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। प्रतापगढ़ से आए कवि डा.रणजीत सिंह ने देश में कोई भूखा न नंगा रहे, ना ही दहशत रहे ना ही दंगा रहे... सुनाकर राष्ट्रीय चेताना जगाने का कार्य किया। गोरखपुर से आए कवि मनमोहन मिश्र ने कहा कि प्रेम की बांसूरी स्नेह की तान थे, कर्मयोगी थे वे ज्ञान की खान थे.. सुनाकर डा.क्षेम के व्यक्तित्व को रेखांकित किया। इसके अलावा बिहार के शंकर कैमूरी, अखिलेश द्विवेदी, कमलेश मिश्रा राजहंस, हरिनारायन सिंह हरिश आदि कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव, दिनेश टंडन, डा. विनोद कुमार सिंह, डा. समरबहादुर सिंह, वीरेंद्र सिंह, जयप्रकाश आदि उपस्थित रहे।