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स माह में डेंगू के 11 व स्वाईनफ्लू के 5 आ चुके हैं मरीज

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जौनपुर। जिले में संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं। अबतक डेंगू के 11, स्वाइन फ्लू के पांच मरीज मिले हैं जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में हुआ। मच्छरों के प्रकोप से डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिला अस्पताल में इन बीमारियों से ग्रसित रोगियों के लिए अलग वार्ड तो बनाए गए हैं लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। यही वजह है कि पीड़ित जिला अस्पताल की जगह निजी अस्पतालों को प्राथमिकता दे रहे हैं। अबतक डेंगू और स्वाइन फ्लू के जो रोगी प्रकाश में आए, उनमें किसी का भी इलाज जिला अस्पताल में नहीं हुआ। पीएचसी और सीएचसी पर पहुंच रहे संक्रामक रोगों से पीड़ित रोगियों को रेफर कर दिया जा रहा है।
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जिले में डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया आदि संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन जिला अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी में मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में डेंगू व स्वाईन फ्लू के मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड तो बनाए गए हैं लेकिन उसमें अपेक्षित सफाई नहीं है। वार्डों में नियमित बेड के चादर नहीं बदली जाती है। सीएचसी व पीएचसी पर ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। जिससे मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज प्राइवेट अस्पताल में अपना उपचार कराने को विवश हो रहे हैं। जिले में 14 सीएचसी, 10 पीएचसी, 73 अतिरिक्त अस्पताल हैं। अधिकतर पीएचसी में दवा की कमी है तो कहीं कभी चिकित्सक ही नहीं आते। इसके चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिले में डेंगू के 11, स्वाइन फ्लू के पांच और मलेरिया के 24 मरीज पाए गए हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा नहीं चेत रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेहतर सुविधाएं का दावा तो कर रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और है। स्वास्थ्य विभाग के पास यह भी डाटा नहीं है कि संक्रामक बीमारियों से पीड़ित रोगी कहां -कहां उपचार करा रहे हैं। जिला अस्पताल में एक भी मरीज डेंगू व स्वाइन फ्लू के रोगियों के लिए 10 बेड का वार्ड बनाया गया है लेकिन इन वार्डों में दूसरे मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसी प्रकार सीएचसी व पीएचसी पर भी दो-दो वार्ड बनाए गए हैं लेकिन चिकित्सक इन मरीजों को भर्ती करने के बजाय रेफर कर दे रहे हैं। सीएमओ डा. ओपी सिंह डेंगू व स्वाइन फ्लू के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। ऐसे मरीजों के लिए जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में अलग वार्ड बनाए गए हैं। एएनएम को गांवों में ऐसे मरीज मिलने की बात आने पर तत्काल सूचना देने और एंटी लारवा स्प्रे का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है। स्वाइन फ्लू, डेंगू वार्ड में दूसरे मरीजों के भर्ती करने के मामले की जांच कराकर संबंधित के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी।
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