मीरगंज (जौनपुर)। रेलवे ट्रैक के नीचे केविल डालने के लिए उत्तर रेलवे के डीआरएम ने अनुमति दे दी है। डीआरएम के निर्देश पर मौके का निरीक्षण करने के बाद सीनियर सेक्सन इंजीनियर डीएन मिश्रा बिजली विभाग को ढाई मीटर गहरी खुदाई कर केबिल डालने की अनुमति दे दी है। शनिवार को वाराणसी से ड्रील मशीन बुलाकर केबिल डालने का काम होगा। इसके बाद 72 गांवों में एक सप्ताह से बाधित बिजली आपूर्ति बहाल हो सकेगी।
रेलवे ट्रैक के नीचे से पड़ी एमबी फीडर की केबिल 27 जुलाई को खराब हो गई थी। बिजली विभाग चार दिन बाद सोमवार को वाराणसी से केविल मंगाकर डालने का प्रयास किया तो केबिल नहीं जा पाई। क्योंकि ट्रैक दोहरीकरण के चलते खुदाई की आवश्यकता है। लगभग 165 मीटर लम्बी केबिल डालना है। इधर बिजली विभाग के अधिकारी तीन दिन तक जेसीबी से केविल डालने का प्रयास किया पर सफल नहीं हुए। इसके बाद काम रोक दिया गया। अब मशीन से ट्रैक के नीचे नया बोरिंग कर केबिल डाला जाएगा। इसके लिए रेलवे से अनुमति लेनी थी। बिजली बिभाग ने रेलवे के अधिकारियों को पत्र लिखा था। पर रेलवे अधिकार लखनऊ होने की बात कहकर मामला टाल दे रहे थे। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में यह खबर प्रमुखता प्रमुखता से छपी। इसके बाद एसडीओ मछलीशहर एम प्रसाद ने डीआरएम लखनऊ को पत्र भेजा। इसके बाद डीआरएम ने तत्काल सीनियर सेक्शन इंजीनियर डीएन मिश्रा को मामले की जांच कर अनुमति देने का आदेश दिया। सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने बिजली विभाग को ढाई मीटर नीचे से खोदाई कर कर केबिल डालने की अनुमति दे दी है। केबिल पड़ने से चौकीकला, अलापुर, हवेली, अमाई, कसेरवा, बसेरवा, कमासिन, रामपुर, चौथार, नवापुर, जरौना, रामडीह, भटहर, मीरपुर, उमरी, गोपपुर, मीरगंज ,करियांव, गुरगुजी, भिदुना, बिसरा, सेमरहो, माधोपुर, इमिलिया, रामपुरखुर्द, सवैया, अगहुआ, किशुनदासपुर, चौकीखुर्दसमेत 72 गांवों की बिजली बहाल हो जाएगी। एसडीओ मछलीशहर मैनेजर प्रसाद का कहना है रेलवे के डीआरएम को पत्र भेजकर अनुमति मांगी गई थी। सीनियर सेक्सन इंजीनियर ने ढाई मीटर नीचे से केविल डालने की अनुमति दे दी है।