जौनपुर। खुद को आईजी बताकर पुलिस अधीक्षक से गाड़ी और गनर मांगने वाले फर्जी आईपीएस राकेश तिवारी को पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय ने सोमवार को कार्यालय बुलाया। उन्होंने उसे चाय पिलाई और बातचीत के दौरान यह पुष्ट होने पर कि वह फर्जी आईपीएस है, उसे लाइन बाजार पुलिस के हवाले कर दिया।
बरसठी थाना क्षेत्र के चकमलाई गांव निवासी राकेश तिवारी मुंबई में रहता है। वह पिछले एक सप्ताह से खुद को 1995 बैच महाराष्ट्र कैडर का आईपीएस अधिकारी बताकर पुलिस अधीक्षक को फोन कर रहा था। उसने पुलिस अधीक्षक से कहा कि वह जौनपुर में अपने घर आ रहा है। वह जहाज से आने के कारण वह साथ में गनर नहीं ले आ पा रहा है। उसने गनर और गाड़ी की व्यवस्था की बात कही। पुलिस अधीक्षक ने उससे इसके लिए लिखित रूप से मांग करने की बात कही। बातचीत से पुलिस अधीक्षक को राकेश तिवारी पर संदेह था, लेकिन उन्होंने इसे जाहिर नहीं किया। इसी बीच राकेश ने फिर फोनकर एसपी से कहा कि आपने गाड़ी नहीं भेजी, उसके घर तेरही है। वह कार्ड लेकर आमंत्रित करने आएगा। सोमवार को राकेश तिवारी एसपी से मिला और बातचीत में अपनी बेटी को भी अफसर बताया। उसकी उम्र देखकर एसपी का संदेह गहरा गया। उन्होंने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश में आपके बैच का कौन है तो वह नहीं बता पाया। बातचीत के दौरान उसने एक-दो लोगों का नाम बताया। एसपी ने उन अधिकारियों से बात की तो उन लोगों ने एसपी को बताया कि राकेश उन्हें भी आईपीएस बताकर फोन करता है। बातचीत के दौरान ही राकेश एक जमीन विवाद की सिफारिश करने लगा तो एसपी को समझने में देर नहीं लगी। शक की पुष्टि होने पर उन्होंने फर्जी आईपीएस राकेश तिवारी को लाइन बाजार पुलिस को बुलाकर थाने भेजवा दिया। पकड़े जाने पर राकेश ने कहा कि वह रा में है, छोड़ेगा नहीं। पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय ने बताया कि राकेश तिवारी खुद को आईपीएस बताकर ऐसे ही अधिकारियों पर धौंस जमाता था। उधर, गिरफ्तार राकेश तिवारी ने थाने में बताया कि उसका मेंटल इलाज चल रहा है। वह क्या बोल जाता है उसे पता नहीं होता है।