जौनपुर में गैर प्रांतों में फंसे छात्रों, मजदूरों व अन्य लोगों को घर लाने के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। करीब 15 हजार लोगों के जौनपुर आने की संभावना है। इसके मद्देनजर जिले में 115 विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाने के लिए चिह्नित किया गया है। वहां भोजन, पेयजल, सफाई आदि की मुकम्मल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों की भी तैनाती आश्रय स्थल वार की गई है।
मुम्बई, सूरत, दिल्ली आदि स्थानों पर नौकरी करने गए जिले के लोग लॉक डाउन के कारण आज भी वहीं फंसे हुए हैं। जिनको सरकार ने अब घर भेजने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद जिले में ऐसे आने वाले लोगों को 14 दिन तक घर नहीं जाने देने के लिए आश्रय स्थल में रखने की सुविधा करने की तैयारी जिला प्रशासन शुरु कर दिया है।
प्रशासन करीब 15 हजार बाहर से आने वाले लोगों का लक्ष्य रख तैयारी कर रहा है। इसके लिए सभी छह तहसीलों के 115 आश्रय स्थल बनाया जा चुका है। इसके अलावां उसमें खाने-पीने से लेकर साफ सफाई की सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले लोगों को दिक्कत न हो। इसके लिए एक -एक आश्रय सेंटर पर प्रभारी नोडल अधिकारी व सह प्रभारी नोडल अधिकारी व तीन प्रभारी अधिकारी की तन्ेेती भी की जा चुकी है।
कहां-कितने आश्रय स्थल
जौनपुर। बाहर से आने वाले लोगों को रखने के लिए सबसे अधिक केराकत तहसील में आश्रय स्थल बनाया गया है। जिसमें केराकत के 25, मछलीशहर के 17, बदलापुर के 15, शाहगंज के 17, सदर के 18, मड़ियाहूं के 23 विद्यालयों को आश्रय स्थाल बनाया गया है।
कोरोना कंट्रोल रुम के नोडल अधिकारी अनुपम शुक्ला का कहना है कि 15 हजार लोगों के बाहर से आने का अनुमान है। इसके लिए 115 विद्यालयों को आश्रय स्थल बनाया जाएगा। हर आश्रय स्थल पर एक प्रभारी नोडल अधिकारी और सह प्रभारी नोडल अधिकारी सहित तीन प्रभारी अधिकारी की तैनाती की गई है।