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भगवत कथा के श्रवण मात्र से ही होता है जीवन धन्य- पंडित कृष्णकांत

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बदलापुर । कलयुग में भागवत कथा का श्रवण करने से जीवन धन्य होता है। भगवान शिव ने स्वयं शुकदेव बनकर भागवत की कथा सुनाई थी।। यह बात वृंदावन धाम से पधारे पंडित कृष्णकांत महराज ने शनिवार को भलुआही गांव में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कहा।
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उन्होंने कहा कि संसार में मानव जीवन को उनके सत्कर्मों अथवा बुरे कर्मों का फल निश्चित ही भुगतना पड़ता है। भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह छह महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे थे। उस दौरान वह वाणों की शैय्या पर लेटे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है, जो इतना कष्ट सहन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहाकि इसका मतलब है कि कर्म का फल सभी को भुगतना होता है। इस लिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। जब भी मौका मिले तब कथा जरूर सुनो और भगवान का भजन करो। अच्छे या बुरे कर्मों का फल हमें जरूर भुगतना पड़ता है। आयोजक उन्नत सिंह ने सभी आंगतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।इस अवसर पर डा. प्रमोद मिश्र , संजय सिंह, कैलाश तिवारी, सत्यम सिंह, माता प्रसाद उपाध्याय, नन्हकऊ यादव, राजेंद्र सिंह, संतोष यादव, वैभव सिंह आदि उपस्थित थे।
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