जौनपुर। जिला कारागार में मंगलवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जहां कवियों ने एक से बढ़कर एक रचना के माध्यम से लोगों में जोश भर दिया। जेल के बंदियों ने तालियों से कवियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रयागराज की कवियित्री मिनाक्षी मयूरी ने पुलवामा की घटना को लेकर देश के सैनिकों और आवाम का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ‘रंगबाजी इस आतंक की बेरंग होनी चाहिए, हो चुका आगाज बस अब जंग होनी चाहिएट छिन गए हैं लाल कितने भारती की गोंद से, कोख पाकिस्तान की भी तंग होनी चाहिए’ सुनाया। डा. पीसी विश्वकर्मा प्रेम जौनपुरी ने कहा ‘ देशभक्ति का लहू ठंडा न होने पाए, इंकलाब ऐसा उठाओ कि कफन जाग उठे।’ अकरम जौनपुरी ने ‘वतन का प्यार दुनिया में मेरी पहचान बन जाए, मैं अपना दिल बनाऊं और हिंदुस्तान बन जाएं’ पर खूब तालियां बटोरीं। पवन तिवारी ने ‘खतरे का कोई वक्त जो आएगा वतन पर, अपने लहू का कतरा कतरा नाम करूंगा’ सुनाया। हरीश शर्मा यमदूत ने कहा ‘मेरी समाधि पर जाकर नेता झूठी सौगंध उठाते हैं, फिर भी ढोंगी दो अक्तूबर न जाने क्यों मनाते है।’ अजय शुक्ल बनारसी ने ‘बनकर मां फिर किसी सैनिक की , ऐसी कई लड़ाइयां लड़ जाती है वीरांगनाएं देश की’ सुनाया। श्रीप्रकाश उपाध्याय, बंदी फुन्नट उसरौली और जेल अधीक्षक एके मिश्र ने भी काव्य पाठ किया। जेलर संजय कुमार सिंह, डिप्टी जेलर सुनील दत्त मिश्रा, वरिष्ठ सहायक खलील अहमद आदि मौजूद थे।