गौराबादशाहपुर(जौनपुर)। मुफ्तीगंज विकास खंड के भदेवरा गांव में पिछले एक माह के दौरान 13 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। इनमें ज्यादातर के लक्षण कोरोना जैसे ही थे, लेकिन जांच न होने के कारण विभागीय रिकार्ड में इनका जिक्र नहीं है। गांव में सिर्फ एक की कोरोना से मौत की पुष्टि की जा रही है। अब भी कई लोग बीमार होकर निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। इन तक अब तक न तो स्वास्थ्य टीम पहुंची और न ही सरकार की मेडिकल किट। सैनिटाइजेशन के नाम पर बस कोरम पूरा करने का आरोप है।
करीब छह हजार की आबादी वाला यह गांव 12 पुरवों में बसा हुआ है। यहां सबसे नजदीकी अस्पताल चार किमी दूरी पर बगथरी में है। इस अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोरोना काल में ओपीडी सेवा बंद है। दूसरा अस्पताल 12 किमी दूर मुफ्तीगंज में है। यहां भी सिर्फ इमरजेंसी के ही मरीज देखे जा रहे हैं। अस्पताल से अधिक दूरी के कारण ज्यादातर लोग खुद से या आसपास के गांवों में उपचार करने वालों से परामर्श लेकर दवा का सेवन कर रहे हैं। यही कारण है कि गांव में होने वाली अधिकांश मौतों का कहीं उल्लेख नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक नमिता सिंह, सुनीता पाठक, हरिशंकर वर्मा, बलिहारी राजभर, मूलचंद राजभर, श्याम देव, नचनी देवी, जगई, आशा देवी, अशर्फी, धनराजी, शिवपूजन की पिछले एक माह के दौरान मौत हुई है। एक-दो को छोड़कर सभी सर्दी-खांसी, बुखार और सांस फूलने से ही ग्रसित थे।
इनके अलावा सुधरा देवी, छोटू वनवासी, खुशी, ज्योति, धर्मराज, सोमरा देवी, करिया, किशन समेत दर्जनों लोग बीमारी से ग्रसित होकर निजी डॉक्टरों से उपचार करा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में तीन आशा कार्यकर्ता और चार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, लेकिन वह यदा-कदा भी भ्रमण पर आती हैं। एएनएम कई दिनों से छुट्टी पर हैं। सैनिटाइजेशन के नाम पर भी सिर्फ कुछ इलाकों में दवा का छिड़काव किया गया है। सीएचसी प्रभारी अधीक्षक डॉ. श्रवण कुमार यादव का कहना है कि भदेवरा गांव में कोरोना से सिर्फ एक महिला की मौत हुई है। बाकी अन्य मौतों का कोई रिकार्ड नहीं है। किसी ने जांच नहीं कराई थी। ब्लाक क्षेत्र के प्रत्येक गांव पर पैनी नजर है। अगर यहां कोई दिक्कत है तो पुन: जांच कराई जाएगी।