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सभी को सता रहा कार्यकर्ताओं के रूठ जाने का डर!

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जौनपुर। लोकसभा का चुनाव अपने चरम पर है। 12 मई को मतदान होना है। भाजपा, कांग्रेस, बसपा-सपा गठबंधन और अन्य प्रत्याशी सियासी मौसम में माहौल बनाने में जुटे हैं लेकिन बड़ी संख्या में समर्थकों, कार्यकर्ताओं का जहां उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अपने भी बेगाने नजर आने लगे हैं। सभी दलों में भीतरघात का खतरा उत्पन्न हो गया है। कुछ प्रत्याशियों के तल्ख तेवर को कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें संभालना प्रत्याशियों के सामने बड़ी चुनौती है। क्योंकि रूठे हुए कार्यकर्ता बनी बनाई खेल बिगाड़ देते हैं। सभी दलों में आतंरिक जंग चल रही है। इसका खुलासा भी समय-समय पर हो रहा है। प्रत्याशी अपने को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी माहौल पूरी तरह से बन नहीं पा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से गुटबाजी का शिकार हो गई है। संगठन के बड़े लोग और नेता वातानुकूलित कक्ष से बाहर नहीं निकल रहे हैं। 2014 में जो लोग भाजपा प्रत्याशी के लिए रात दिन एक किए थे। वह लोग प्रचार नहीं कर रहे हैं। भाजपा समन्वय समिति ने कई बार बैठक कर प्रत्याशी केपी सिंह को चेता चुकी है कि कुछ ऐसे लोगों को लेकर वह प्रचार न करें। जिन्हें लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। केपी सिंह भी ऐसे लोगों को साथ नहीं ले जाना चाहते लेकिन उनसे पिंड नहीं छुड़ा पा रहे हैं। दो एक नेताओं को छोड़ दिया जाए तो कोई भी मन से नहीं लगा है। हां यह जरूर है कि अपना-अपना उल्लू सीधा करने में सभी लोग जुटे हैं। भाजपा के कई बड़े चेहरे प्रचार में नहीं दिख रहे हैं। मछलीशहर में भाजपा ने बसपा से भाजपा में आए बीपी सरोज को टिकट तो दिया लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं के गले वह उतर नहीं पा रहे हैं। कार्यकर्ता रूठा हुआ है। उन्हें मनाने का कोई प्रयास भी नहीं हो रहा है। सांसद रामचरित्र निषाद का टिकट कटने के बाद भाजपा छोड़ सपा में जाने के बाद उनके लोग अलग थलग पड़े हैं। उन्हें जोड़ने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है। हालांकि संगठन के आला लोग ऐसे लोगों को चुनाव की मुख्य धारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उन्हें कामयाबी मिल नहीं रही है।
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बसपा-सपा गठबंधन में भीतरघात जारी है। प्रत्याशी का तल्ख तेवर लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। मल्हनी विधानसभा में प्रत्याशी के तल्ख तेवर का सपा के एक बड़े नेता ने कड़ा प्रतिवाद किया और कहा कि चुनाव में कार्यकर्ताओं से लेखपाल जैसा व्यवहार न करें। कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाकर ही सियासी युद्घ को जीता जा सकता है। कार्यकर्ता रूठ गए तो परिणाम भी पलट सकते हैं। इसको लेकर काफी चर्चाएं हैं। मछलीशहर के प्रत्याशी और सपा कार्यकर्ताओं में तालमेल बैठ नहीं पा रहा है। चुनावी गतिविधियां से कार्यकर्ता दूर है। दोनों के बीच खटास जारी है जिससे नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बसपा को अपने कैडर वोट पर पूरा भरोसा है लेकिन सपा का पूरा वोट ट्रांसफर हो पाएगा यह तो समय ही बताएगा।
कांग्रेसी कुनबे में भी अंदरूनी रार है। वैसे तो कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की संख्या काफी कम है। फिर भी पूरे मन से कार्यकर्ता अभी नहीं लग पाया है। जौनपुर सदर के पूर्व विधायक नदीम जावेद नामांकन के बाद से गायब हैं। अभी वह पूरे मन से चुनाव में लग नहीं पाए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी देवव्रत मिश्र तो पूरे परिवार के साथ दिन रात जनसंपर्क कर तो रह हैं लेकिन मुंगराबादशाहपुर, बदलापुर के अलावा अन्य विधानसभाओं में माहौल अभी नहीं बना पा रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं की कोई सभा अभी नहीं लगी है। कई नेताओं की नाराजगी स्पष्ट नजर आ रही है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक जो गिनती में हैं उनका कोई कार्यक्रम नहीं लग पाया है। पूरे कांग्रेसी कुनबे को रणभूमि में उतारना कांग्रेस प्रत्याशी के लिए एक चुनौती है।
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इनसेट--
गाड़ी निर्दल प्रत्याशी की, प्रचार सामग्री भाजपा का
जौनपुर। सियासी मौसम में तरह-तरह के मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को पुलिस ने एक गाड़ी पकड़ा। गाड़ी एक निर्दल प्रत्याशी की थी लेकिन जब गाड़ी की तलाशी पुलिस ने लिया तो उसमें प्रचार सामग्री भाजपा की निकली। यह अलग बात है कि निर्दल प्रत्याशी ने चालक को काफी खरी खोटी सुनाई। उधर पुलिस ने सिफारिश पर गाड़ी को छोड़ दिया और प्रचार सामग्री जब्त कर लिया।
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