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भगवत शरण में जाने से कट जाते हैं सारे पाप

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सिकरारा (जौनपुर)। कथा वाचक पं. नरेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि मानव जीवन भर तमाम प्रकार के माया जाल में फंस कर धर्म के रास्ते से दूर हो जाता है। अंत समय में उसे प्रभु स्मरण आता है। प्रभु बड़ा दयालु है, जो भी उसकी शरण में जाता है, उसको त्रिविध ताप से मुक्ति मिल जाती है। भगवत शरण में जाने से उसके सारे पाप मिट जाते हैं। वह सोमवार को क्षेत्र के गड़रहा रीठी गांव स्थित भूलेश्वर नाथ पाण्डेय के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रभु बड़ा ही दयालु है। वह अकारण ही अपने भक्तों की निश्चल भक्ति पर प्रसन्न होकर उस पर अहैतुक कृपा करता है। यह वैदिक कथाओं में प्रमाणित है कि जिन प्रभु दर्शन के लिए ऋषि मुनि कल्प कल्पान्तर तक पूजा अर्चना तपस्या करते हैं। उसी लीलाधारी योगेश्वर श्री कृष्ण को गोपियां थोड़े से छाछ के लिए नाचने पर मजबूर कर देती हैं। रसखान ने लिखा है, ताहि अहीर छोहरियां छछिया भरि छाछ पे नाच नचावइ। श्रीकृष्ण की बाल लीला लालित्य व माधुर्य से ओतप्रोत हैं। माता यशोदा अपने लल्ला को मिट्टी खाने से रोकती हैं। कृष्ण कहते हैं मइया मैंन मिट्टी नहीं खाया हैं। उनके इंकार पर भी वह नहीं विश्वास करती और मुंह खोलने को कहती हैं। कन्हैया ज्योंही मुंह खोलते हैं माता यशोदा को वहां पूरा ब्रह्मांड दिखाई देता है। वह घबरा कर आंखें बंद कर लेती हैं। वह उनसे निवेदन करती हैं कि वे उन्हें उसी बाल रूप में ही दर्शन दें। ईश्वर प्राप्ति के लिए पूर्ण समर्पण आवश्यक है। वह भक्तों की भावना देखता है। केवल पूजा पाठ के माध्यम से उसे प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसका ज्वलंत उदाहरण भक्त विदुर की निश्छल भक्ति है। जिसके वश में कन्हैया उनके यहां जाकर रसोईं में बचा खुचा साग बड़े ही चाव से खाते हैं। जबकि राजा दुर्योंधन के यहां छप्पन भोग को त्याग देते हैं। प्रारंभ में यजमान भूलेश्वर नाथ पाण्डेय तथा राधेश्याम पाण्डेय ने भागवत ग्रंथ व व्यास का पूजन अर्चन कर आरती की। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डा. राकेश मिश्रा (मंगला गुरु), ओम प्रकाश उपाध्याय, बाबुल नाथ, गिरिजा शंकर, प्रेम चन्द्र, विनोद पांडेय, वेद प्रकाश, आशीष पांडेय आदि मौजूद रहे।
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