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एक माह में 12 मौतें, फिर भी जांच से कतरा रहे लोग

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पंचायत चुनाव के बाद गांवों में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ने लगा। सुजियामऊ गांव में भी पिछले एक माह के दौरान एक दर्जन मौतें हुई हैं। ज्यादातर लोग बीमारी से ही मरे हैं, लेकिन कहीं भी जांच न कराने के कारण उनका जिक्र नहीं है। कई लोग बीमार भी हैं। लगातार हो रही मौत से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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करीब चार हजार की आबादी वाले सुजियामऊ गांव में अमूमन हर दूसरे घर में सर्दी-खांसी, बुखार के मरीज मिले हैं। जागरूकता के अभाव में लोगों ने खुद से ही दवाएं खरीद कर सेवन किया। तबीयत बिगड़ने पर जब अस्पताल की ओर भागे तो संसाधन के अभाव में उनकी जान चली गई। गांव के श्रीपति उपाध्याय बताते हैं कि पिछले एक माह के दौरान 12-15 लोगों की मौत हुई है। जांच न होने से किसी में भी कोरोना की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन लक्षण के आधार पर इसकी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। काफी शोरगुल मचने के बाद सफाई कर्मी ने दवा का छिड़काव किया। अब स्थिति में कुछ सुधार है, लेकिन कोरोना का भय अब भी बना हुआ है। लोग मिलने-जुलने से परहेज कर रहे हैं। गांव में पीएचसी-सीएचसी न होने से लोगों को पांच किमी दूर नौपेड़वा और 15 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। प्रधान पति प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि गांव में 10-11 मौतें हुई हैं। किसी की कोरोना जांच नहीं हुई थी, इसलिए मौत के कारण स्पष्ट नहीं हैं। कुछ मौत स्वाभाविक भी थी। अचानक हुई मौतों के कारण लोगों में भय बना हुआ है। उन्हें जागरूक किया जा रहा है।
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सुजियामऊ में मौत के बारे में जानकारी नहीं है। लोगों को लगातार इस बात के लिए जागरूक किया जा रहा है कि बीमारी को छिपाएं नहीं, समय से जांच कराएं। साधारण सर्दी-जुकाम व बुखार होने पर तुरंत नजदीक के अस्पताल पर संपर्क करें और सही दवा का सेवन करें। ताकि बीमारी बढ़ न सके। जांच व दवा में लापरवाही जान जोखिम में डाल सकती है। -डॉ. एके रघुवंशी, नौपेड़वा, सीएचसी।
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