व्यंग्यगकार कृष्णकान्त एकलव्य की पुण्यतिथि पर रविवार की शाम जज कालोनी स्थित वरिष्ठ कवि गिरीश श्रीवास्तव गिरीश के आवास पर काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।
अध्यक्षता गीतकार जनार्दन अस्थाना पथिक व मुख्य अतिथि बाल कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष संजय उपाध्याय रहे। रमेश चंद्र सेठ ने कविता के जरिए श्रद्धांजलि दी। रामजीत मिश्र ने मकान और खिड़कियां शीर्षक से कविता पाठ किया। अशोक मिश्र ने जनहित ही हरदम रहा जीवन का गंतव्य दोहा से श्रद्धांजलि दी। गिरीश श्रीवास्तव गिरीश ने फिसलती पांव के नीचे जमीं महसूस होती है, अभी सूखे नहीं आंसू नमीं महसूस होती है। जहां भी हो चले आओ हमारे दिल की महफिल में, मुझे पल-पल तुम्हारी ही कमी महसूस होती है मुक्तक पढ़कर एकलव्य को याद किया। अनिल उपाध्याय ने सरस्वती के वरद पुत्र को हम सभी का प्रणाम कविता पढ़ी। ओपी खरे ने व्यंग्य तरंग के शीर्ष पुरुष एकलव्य तुम्हारी याद सतावे रचना पढ़ी। प्रो.आरएन सिंह ने दुश्मनों से भी मत कुछ गिला कीजिए, फूल बनकर चमन में खिला कीजिए रचना पढ़ी। संचालन कर रहे वरिष्ठ व्यंग्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने हर बार निशाना चूक जाता है कविता पाठ किया। आयोजक गिरीश श्रीवास्त गरीश ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर डा.पीसी विश्वकर्मा, डा.धीरेन्द्र पटेल, देवांश उपाध्याय, मनोज श्रीवास्तव, जीतेन्द्र उपाध्याय, बाबा धर्मपुत्र अशोक, विनय श्रीवास्तव, सरोज श्रीवास्तव अन्य ने भी एकलव्य को श्रद्धांजलि अर्पित की।