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पाउच और बोतल के पानी से बुझा रहे हैं प्यास

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जौनपुर। करीब तीन लाख की आबादी वाले इस शहर में पेयजल की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। सिर्फ राहगीरों को ही नहीं बल्कि यहां के रहवासियों को भी पाउच या फिर बोतल का पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। गिनती के लिए तो शहर में 1590 इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगाए गए हैं, लेकिन अधिकतर हैंडपंप खराब हैं या फिर हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं है। शहर के गली मोहल्लों में लगे इन हैंड पंपों में से गिने चुने हैंडपंप ही लोगों की प्यास बुझाने के काम आ रहे हैं।
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शहर के मोहल्ला मीरमस्त, नवाब यूसूफ रोड, पुरानी बाजार, ढालगरटोला, ख्वाजगी टोला, सब्जीमंडी, कशेरी बाजार समेत शहर के कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां गरीब परिवार के बच्चों को प्यास लगती हैं तो वे घर वालों से पैसे मांगते हैं। घर से दो रुपये मिलने पर वे पास की किसी दूकान पर जाकर पाउच का पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझाते हैं। मोहल्ला मीरमस्त निवासी शकील मंसूरी कहते हैं कि जिन घरों में महिलाएं बीड़ी बनाकर अपना गुजारा करती हैं उन परिवार के लोगों को भी पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। ख्वाजगी टोला निवासी मुमताज शाह कहते हैं कि एक समय था कि जब गली मोहल्लों में सामान्य हैंडपंप का पानी भी लोग पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब वह गुजरे जमाने की बात हो गई है। उनके मोहल्ले में दो सौ मीटर की परिधि में तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं जिसमें से दो खराब हैं एक एक का पानी पीने लायक नहीं है। सबसे अधिक समस्या शहर की मलिन बस्तियों में हैं। आर्थिक रूप से सम्पन्न लोगों के घरों में सबमर्सिबल और आरो सिस्टम लगा है लेकि गरीब परिवार के लोगों के पास ऐसी सुविधा नहीं है। जिससे शुद्ध पानी के लिए उन्हें पैैसे खर्च करने होते हैं। शहर के करीब तीस हजार घरों में नगरपालिका का पानी का कनेक्शन है जहां सुबह शाम पानी की सप्लाई की जाती है। लेकिन इस पानी का इस्तेमाल लोग नहाने, कपड़े धोने और शौचालय के लिए ही इस्तेमाल करते हैं। सप्लाई का पानी भी शुद्ध नहीं होता जिससे लोग पीने से परहेज करते हैं।

हैंडपंप की तलाश में भटकते हैं लोग
जौनपुर। गांव से शहर आने वाले लोगों को भी प्यास लगने पर हैंडपंप की तलाश में भटकना होता है। शहर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में गांव से लोग आते हैं। कचहरी से लेकर शहर की प्रमुख मंडियों, बाजारों और स्कूल कालेजों में भी सर्वाधिक भीड़ गांव के लोगों की होती है। गांव से शहर आने वाले लोगों को प्यास लगने पर पानी की तलाश में इधर उधर भटकना होता है। पाउच और बोतल का पानी खरीदने के अलावा प्यास बुझाने के लिए उनके पास कोई दूसरा चारा नहीं होता। मुकदमें के सिलसिले में कचहरी आए बक्शा के दरियावगंज गांव निवासी प्यारेलाल कहते हैं कि कचहरी परिसर में भी हैंडपंप खराब पड़े हैं।
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पेयजल के लिए शहर में 1590 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए हैं जिसमें जिसमें से करीब 150 हैंडपंप खराब होने की सूचना है। खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद की है।
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एसके सिंह
एक्सईएन जलनिगम
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