जौनपुर। जिले में समस्याओं की कमी नहीं है। मगर सबसे ज्यादा चिंता शहर में लगने वाला जाम और गोमती नदी का प्रदूषण है। जाम से निजात पाने के लिए शहर के लोग ओवरब्रिज की मांग करते रहे हैं। बेरोजगारी, उद्योगों का पलायन, मेडिकल कालेज का निर्माण का मुद्दा भी अबकी प्रमुखता से उठेगा। जिले में मतदान छठवें चरण में 12 मई को होगा लेकिन अभी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं हुई है। लिहाजा चुनाव की सरगर्मी भी नहीं तेज हुई है। सपा-बसपा गठबंधन, भाजपा, कांग्रेस एवं अन्य दलों से टिकट पाने के लिए नेता गणेश परिक्रमा में जुटे हुए हैं लेकिन अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है। जहां तक मुद्दों का सवाल है पिछले लोकसभा के कई चुनाव में कुछ प्रत्याशियों ने अपने घोषणा पत्र में विकास की बात किया था। उन्होंने गोमती नदी के दोनों किनारों पर सड़क बनाने की बात की थी। इसके अलावा भी उन्होंने कई आश्वासन दिए थे। यह कितना पूरा हुआ यह तो वहीं बताएंगे। लेकिन गोमती नदी के किनारे कोई सड़क दिखाई नहीं दे रही है। मेडिकल कालेज की स्थापना सपा शासनकाल में तीन वर्ष पूर्व हुई लेकिन अभी ओपीडी शुरू नहीं हो सकी है। चार साल से बन रहा सिटी स्टेशन के पास मड़ियाहूं रोड पर ओवरब्रिज भी अधूरा पड़ा है। सीहीपुर रेलवे क्रासिंग, जगदीशपुर रेलवे क्रासिंग, सिपाह रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनने का सपना लोगों का पूरा नहीं हो पा रहा है। जनता जाम से परेशान है। सतहरियां में इंड्रस्ट्रीयल स्टेट का बुरा हाल है। पर्यटन के रूप में जिले को विकसित कराने का दावा फेल हो गया है। ऐतिहासिक धरोहरों का कोई देख रेख नहीं हो रहा है। शाही किला में हर रोज दो हजार लोग टहलने, देखने लोग जाते हैं लेकिन यहां न तो कोई शौचालय है और न ही पानी पीने का कोई इंतजाम है। बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोगों का जाना कम हो गया है। जबकि शाही किला में जाने वालों से 25 रूपए शुक्ल लिया जाता है। चुनाव में यह समस्याएं लोगों के सामने मुद्दों के रूप में होगी।