जौनपुर। गोमती नदी की तकरीबन 100 एकड़ भूमि पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। लेखपालों की मिली भगत से कब्जा कर लोगों ने मकान, स्कूल, कॉलेज एवं सहन बना डाला है। पचास वर्ष में कभी भी शहर क्षेत्र में नदी के जमीन की पैमाइश नहीं कराई गई है। पिछले वर्ष तत्कालीन एसडीएम प्रियंका प्रियदर्शनी ने एक घाट की पैमाइश कराने का प्रयास किया था लेकिन खास सफलता नहीं मिली।
गोमती नदी शहर के बीच से बहती है। जिले में लगभग 70 किलोमीटर सफर करके गाजीपुर जिले में गंगा में मिलती है। बीचोबीच बहने वाली गोमती शहर की पहचान है। नदी तट की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे होने लगे हैं। सद्भावना पुल दक्षिणी छोर, बजरंग घाट, कटघरा, आशियाना कालोनी, तुतीपुर, मियांपुर, बलुआ घाट, कटघरा सहित कई स्थानों पर तकरीबन 100 एकड़ नदी की भूमि पर कब्जा करके लोगों ने मकान, स्कूल-कॉलेज आदि बनवा डाला है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद नदी, पोखरा, सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों को चिह्नित करके भूमि खाली कराने का अभियान शुरू किया तो लोगों की उम्मीद थी कि गोमती भी अतिक्रमण मुक्त हो जाएंगी। मगर जौनपुर शहर में गोमती नदी की भूमि की पैमाइश तक नहीं कराई गई। गोमती की जमीन पर कई स्कूल, कालेज आदि बने हैं और उनको बकायदा मान्यता तक मिल गई है। लेखपालों की मिलीभगत से लोग नदी की भूमि पर कब्जा करते जा रहे हैं।
दाखिल करेंगे जनहित याचिका
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता का कहना है कि नदी के 100 एकड़ भूमि पर लोगों ने कब्जा कर मकान, स्कूल, कॉलेज बनवा लिया है। प्रशासन उदासीन है। कभी भी कोई पैमाइश हुई ही नहीं। लेखपालों की मिलीभगत से यह खेल जारी है। ऐसा ही रहा तो नदी का दायरा घट जाएगा।
गोमती नदी के दोनों किनारों को विकसित करने की योजना है। इसके लिए नदी की भूमि की पैमाइश कराई जाएगी और उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। इस मामले में किसी लेखपाल की संलिप्तता की बात सामने आने पर उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-अरविंद मलप्पा बंगारी, जिलाधिकारी