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गरीबों सवर्णों के आरक्षण को बताया चुनावी जुमला

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जौनपुर। गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को संसद के शीत सत्र में पारित करने की कवायद को लेकर लोगों ने सवाल उठाया है। मोदी सरकार संविधान में बदलाव कर आरक्षण आर्थिक आधार पर ला रही है। जिसकी अभी संविधान में व्यवस्था नहीं है। संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण की बात कही गई है। ऐसे में लोगों को सरकार की मंशा पर संदेह हो रहा है। लोगों का कहना है कि आरक्षण देना ही है तो 50 फीसदी के अंदर आरक्षण दिया जाए।
- केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराए। जिसकी जितनी संख्या हो उसी आधार पर आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करे, ऐसी सपा की मांग है। लेकिन सरकार की सोच अच्छी नहीं है।
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शैलेंद्र यादव ललई, पूर्वमंत्री एवं सपा विधायक शाहगंज
- बसपा मुखिया मायावती बहुत पहले ऐसा प्रस्ताव लाई थी। उनका कहना था कि सामाजिक रूप से जो लोग पिछड़े हैं, उनको आरक्षण मिलना चाहिए। इतने दिन से सदन चल रहा था। अचानक विधेयक लाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा कर रहा है।-सुषमा पटेल, बसपा विधायक मुंगराबादशाहपुर
- कांग्रेस ने इसका समर्थन किया है। लेकिन यह सरकार की कवायद चुनावी जुमला ही साबित होगा। भाजपा को डर है कि संवर्ण कांग्रेस की तरफ खड़ा हो गया है।-नदीम जावेद, अध्यक्ष, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ
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- चुनाव से पूर्व ऐसी घोषणा मूर्ख बनाने के लिए है। 60 प्रतिशत लोगों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला है और 40 प्रतिशत को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कह रहे हैं। जिसका जितना जातिगत आंकड़ा हो, उसी हिसाब से आरक्षण होना चाहिए।-ओम प्रकाश दूबे बाबा दूबे, पूर्व विधायक सपा
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