कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भोजन और अन्य खर्चों के नाम पर प्रदेश के कई जिलों में लाखों रुपये का गोलमाल हुआ है। हालांकि जौनपुर में कस्तूरबा विद्यालयों के संचालन से जुड़े जिम्मेदारों का दावा है कि यहां भुगतान में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है।
21 विकास खंडों वाले जौनपुर जिले में कुल 19 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। शहर से करीब के सिकरारा और सिरकोनी विकास खंड में कस्तूरबा विद्यालय की स्थापना इसलिए नहीं की गई कि इन दोनों विकास खंडों की महिला साक्षरता दर जिले की साक्षरता दर से भी अधिक है। प्रत्येक विद्यालयों में 100 की संख्या में बालिकाएं पढ़ती हैं। इन बालिकाओं को दोनों टाइम भोजन, नाश्ता, साबुन, तेल पर प्रतिदिन 60 रुपये की दर से सरकार बजट खर्च करती है। जिले के सभी 19 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कुल 1900 बालिकाएं पढ़ाई करती हैं। इन पर प्रतिदिन 60 रुपये की दर से कुल 1.14 लाख का बजट खर्च होता है। यह धनराशि बच्चों को भोजन और अन्य जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने वाली एजेंसी के बैंक खाते में भुगतान की जाती है। जिले में कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल लॉकडाउन के बाद मार्च में विद्यालय बंद कर छात्राओं को घर भेज दिया गया था। इस साल फरवरी में विद्यालय खुला तो 15 दिन बाद ही 25 फरवरी को होली की छुट्टी कर दी गई। होली के बाद स्कूल फिर खुलना था, लेकिन उसी बीच कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलने लगा तो विद्यालय नहीं खुले। एएओ जितेंद्र प्रसाद का कहना है कि मार्च में एजेंसी को भुगतान किया गया था, लेकिन फरवरी में जितने दिन विद्यालय चला था, उतने दिन का ही भुगतान किया गया है। भुगतान से संबंधित सारा लेखा जोखा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड है।