कालपी। यमुना का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान 108 मीटर को पार कर 108.06 मीटर पर पहुंच गया।25 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। 20 हजार लोग पानी के चारों ओर घिरे हुए हैं। छह गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। चार गांवों में खंभे आधे से अधिक पानी में डूब चुके हैं। प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि लोग बिजली के खंभों और तारों के पास न जाएं एहतियात के तौर पर इन क्षेत्रों की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है।
कालपी तहसील के पड़री, रायड़ दिवारा, गूढ़ा खास, उरकरा कला, गुढा मंगरोल, हीरापुर, महेवा, पिपरौंधा, सीकरी, रहमानपुर, सिमरशेख, दहेलखंड, जीतामऊ, देवकली, शेखपुरा, मैंनूपुर, किरतपुर, माधौगढ़ तहसील के निनावली जागीर, कुसेपुरा, किशनपुरा, डिकौली जागीर, जालौन तहसील के संकरपुर, भदेख, टिकरी और नरहान, उरकरा, कला, नरोल बाढ़ के पानी से घिरे हैं। पड़री, नरहान, पिपरौंधा, रायड़, दिवारा, उरकरा कला सहित आधा दर्जन गांवों का तहसील मुख्यालय से सीधा संपर्क कट चुका है।
ग्रामीणों को अब 30 से 40 किलोमीटर का चक्कर लगाकर मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। अधीक्षण अभियंता नंदलाल ने बताया कि चार गांवों में बिजली के खंभे डूब चुके हैं या ट्रांसफार्मरों के पास पानी भर गया है। वहां सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। स्थानीय एसडीओ और जेई को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक स्थिति सुरक्षित न हो, बिजली चालू न की जाए।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 30 जुलाई को शाम छह बजे यमुना का जलस्तर 108.060 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान 108 मीटर से ऊपर है। आयोग के सदस्य रूपेश कुमार ने बताया कि यमुना का जलस्तर हर घंटे लगभग 10 सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है और अगले 24 घंटे में जलस्तर और ऊपर जाने की संभावना है। यदि यही स्थिति रही, तो रात में बाढ़ विकाराल रूप ले लेगी। वर्ष 1996 में यमुना का जलस्तर 112.98 मीटर तक पहुंचा था। बाढ़ के पीछे चंबल, कोटा बैराज और अन्य सहायक नदियों से छोड़े गए करीब चार लाख क्यूसेक पानी को कारण माना जा रहा है।
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प्रशासनिक व्यवस्थाएं और राहत केंद्र
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय, पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार, अपर जिलाधिकारी संजय कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रामपुरा के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में बने राहत केंद्र का भी दौरा किया गया। अब तक बाढ़ से 11 गांवों के 1150 लोग प्रशासनिक सहायता की परिधि में लाए गए हैं। प्रशासन ने 16 राहत केंद्र सक्रिय किए हैं। यहां भोजन, स्वच्छता, चिकित्सा, पानी आदि की व्यवस्था की गई है। पशुओं के लिए चारा, टीकाकरण और दवाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं। जिले में 36 छोटी नावें, 16 बड़ी नावें, 20 मोटरबोट राहत कार्य में लगाई गई हैं। एसडीआरएफ टीम भी मौके पर मौजूद है। हर गांव में सतत निगरानी की जा रही है। एसडीएम मनोज कुमार और तहसीलदार अभिनव कुमार तिवारी ने भी मगरोल, पिपरौंधा, पड़री और अन्य तटीय गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, हम 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं और हर आपात स्थिति से निपटने को तैयार हैं।
सिर्फ डेढ़ किलोमीटर सड़क ऊंची होती, तो हर साल दो दर्जन गांवों का संपर्क न टूटता
रामपुरा। हर साल बाढ़ में नदिया पार के दो दर्जन गांवों का संपर्क टूटने के पीछे प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है। अगर रामपुरा से निनावली जाने वाली सड़क को मात्र डेढ़ किलोमीटर तक ऊंचा कर दिया गया होता और कुसेपुरा पुलिया की ऊंचाई बढ़ा दी जाती, तो हर साल इन गांवों की मुसीबत कम हो सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के चलते लगभग 2000 बीघा बाजरा और तिली की फसल डूब जाती है। नदिया पार के गांवों में नीनावली, नरौल, कदमपुरा, हनुमंतपुरा, सिद्धपुर, दिकोली, राठौरणपुरा, हुकूमपुरा और बिलोंड प्रमुख हैंं जिनका संपर्क हर मानसून टूट जाता है। स्थानीय निवासी सुनील पाठक ने कहा कि प्रशासन बाढ़ आने के बाद लाखों रुपये राहत और व्यवस्थाओं में खर्च करता है। यदि समय रहते यह सड़क और पुलिया ऊंची कर दी जाए तो गांवों की यह सालाना मुसीबत कम हो सकती है। (संवाद)
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फोटो 58- नाव के सहारे ग्रामीणो का आवागमन। स्रोत ग्रामीण
कदौरा ब्लॉक के कई गांवों का संपर्क टूटा, ग्रामीणों में दहशत
कदौरा। यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कदौरा ब्लॉक के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। इकौना, निधान का डेरा, झगराई का डेरा, पाली, अभिरवा और गुलौली गांवों की हालत बेहद गंभीर है। सड़कों पर पानी भर जाने से ग्रामीणों को नावों के सहारे सफर करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि कदौरा-इकौना मुख्य सड़क करीब 20 फुट तक पानी में डूब चुकी है। इससे बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी परेशानी हो रही है। यमुना के किनारे बसे गांवों के रास्ते जलमग्न हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई राहत या बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इकौना में बाढ़ चौकी होने के बावजूद कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। इकौना और निधान का डेरा जोड़ने वाला मार्ग भी जलमग्न है। ग्रामीणों को न तो लाइफ जैकेट दी गई है और न ही कोई सुरक्षा उपकरण, जिससे उनकी जान खतरे में है। (संवाद)