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आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा

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कार्यशाला में जानकारी देते डॉक्टर - फोटो : ORAI
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उरई। आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए मिल जुलकर काम करना होगा। आत्महत्या के विचारों को रोककर आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। यह बात सीएमओ कार्यालय में मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में एसीएमओ डा. बीएम खैर ने कही।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में मानसिक विकार आ जाता है तो उससे बात जरूर करें। आत्महत्या का विचार करने वाले व्यक्ति से बात कर उसके व्यवहार में परिवर्तन कर उसे ऐसा करने से रोका जा सकता है। व्यक्ति को संतुष्टिपूर्ण व तनावरहित जीवनशैली अपनानी होगी। मनोरोग चिकित्सक डा. तारा शहजानंद ने कहा कि डब्लूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। हर घंटे एक छात्र आत्महत्या कर रहा है। आत्महत्याओं का 80 फीसदी का कारण अवसाद, 10 फीसदी सीजोफ्रेनिया और 25 फीसदी कारण नशा होता है।
उन्होंने बताया कि महिलाएं आत्महत्या की कोशिश ज्यादा करती हैं जबकि पुरुष आत्महत्या ज्यादा करते है। उन्होंने बताया अधिकतर मामलों में आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के लक्षण पहले से पता चल जाते हैं। लिहाजा ऐसे व्यक्ति को समझाकर उसके व्यवहार में परिवर्तन कर आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य, आर्थिक मामलों, अच्छे आपसी संबंध, मन की शांति (संतुष्टि), रुटीन से हटकर काम करने मानसिक व्यवहार में परिवर्तन जैसे पांच बिंदुओं में बदलाव कर व्यक्ति मानसिक रुप से स्वस्थ रह सकता है।
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उन्होंने बताया कि जिले भर के करीब 67 स्कूलों के शिक्षकों को मानसिक रोग की रोकथाम के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह नोडल अधिकारी अपने-अपने स्कूल में कक्षा छह से बारह तक की छात्राओं को मनपरी और छात्रों को मनदूत बनाएंगे। यह मनदूत और मनपरी अपनी कक्षाओं में देखेंगे कि कोई बच्चा मानसिक रुप से अस्वस्थ तो नहीं है। वह आत्महत्या के विचार तो नहीं कर रहा है। ऐसे लक्षण मिलने पर उसकी जानकारी नोडल अध्यापक के माध्यम से मन कक्ष तक पहुंचाई जाएगी। फिर बच्चे का इलाज भी किया जाएगा। इसके अलावा जिला अस्पताल में मन कक्ष बनाया गया है। जहां मानसिक रोगियों का निशुल्क इलाज किया जाता है।
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