उरई। जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नंबर लगाने के विवाद में दो महिलाओं ने जमकर हंगामा किया। स्टाफ ने किसी तरह समझा बुझाकर मामला शांत किया और टोकन देकर नंबर बांटे।
जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध है। जिसकी वजह से रोजाना अल्ट्रासाउंड के लिए भीड़ उमड़ रही है। भीड़ के कारण आए दिन विवाद होता रहता है।जिला अस्पताल में रेडियोलाॅजिस्ट ने व्यवस्था बनाने के लिए रोजाना 35 टोकन बांटकर उनके अल्ट्रासाउंड करने की व्यवस्था की है। इसके बाद इमरजेंसी, मेडिको लीगल, कोर्ट, कारागार व वीआईपी अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। रोजाना करीब 60 तक अल्ट्रासाउंड होते है।
शुक्रवार को सुबह सात बजे से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लाइन लग गई। एक व्यक्ति ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पर्चे एकत्रित करने की बात कही। इस पर दो महिलाएं अपना पर्चा ऊपर नीचे करने की बात पर विवाद करने लगी। इस पर हंगामा हो गया। बाद में कर्मचारी ने आकर समझाया कि पर्चे से नहीं, टोकन से नंबर लगेगा। इसके बाद मामला शांत हुआ। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ का कहना है कि उनके सामने इस तरह का कोई विवाद नहीं हुआ है। न ही इस तरह की जानकारी है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठप, गर्भवती परेशान
उरई। महिला अस्पताल में छह माह से अल्ट्रासाउंड सेवाएं बंद है। जिसकी वजह से गर्भवती व अन्य महिलाओं को जिला अस्पताल जाकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। गर्भवती व अन्य महिलाएं निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड कराने को विवश है।
जानकारी के मुताबिक यहां तैनात डॉ. गौरव दुबे के स्थानांतरण के बाद कुछ दिन बाद अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रही। नए चिकित्सक की तैनाती की गई तो अल्ट्रासाउंड मशीन में तकनीकी समस्या आ गई। जिसकी वजह से मशीन को सुधरने के लिए साइरिस कंपनी को अवगत कराया है। छह मार्च को डीएम राजेश कुमार पांडेय ने जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल की एक मशीन तत्काल महिला अस्पताल भेजने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर मशीन महिला अस्पताल भेज दी गई है लेकिन अभी चालू नहीं हुई है। इसके चलते गर्भवती व अन्य महिलाएं परेशान है। इस बाबत महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा का कहना है कि अधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। जल्द अल्ट्रसाउंड का काम शुरू हो जाएगा।