कोंच (जालौन)। नगर में जलापूर्ति के लिए नई पाइप लाइन बिछाने के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद लोगों के चेहरों पर मुस्कान आई है। दूसरी तरफ पिछले कई वर्षों से नगर की जनता सीवर की गंभीर समस्या से जूझ रही है। इसके बावजूद सीवर लाइन दोबारा बनाने का प्रस्ताव शासन में हर बार की तरह अभी भी लंबित है। जिससे लोगों में मायूसी है। कस्बे के नागरिकों का मानना है कि अगर दोनों ही योजनाओं को मंजूरी मिल जाती तो उन्हें तो आराम हो ही जाता, सड़कों की बार-बार खुदाई भी नहीं करानी पड़ती जिससे सरकारी धन भी बचता।
78 करोड़ 79 लाख से बिछेगी पाइप लाइन
पेयजल आपूर्ति की लाइन बिछाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था जो मंजूर हो गया है। योजना के तहत 78 करोड़ 79 लाख की लागत से नगर में पाइप लाइन बिछाने का काम किया जाना है। कस्बे की एक और भीषण समस्या सीवर नेटवर्क पुनर्गठन का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है जो फिलहाल जोरदार पैरवी नहीं होने के कारण लंबित पड़ा है। नागरिकों का कहना है कि सीवर नेटवर्क पुनर्गठन के प्रस्ताव पर भी अगर शासन की मोहर लगती और दोनों लाइनें एक साथ डाली जाएं तो नगर की जनता को भी आराम रहेगा और शासन का बजट भी बचता जो नगर की सड़कों की बार-बार खुदाई पर खर्च होगा। इसके अलावा महीनों के हिसाब से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा सो अलग। हालांकि इसके लिए भी जल निगम द्वारा पत्राचार किए जाने की बात कही जा रही है।
सीवर लाइन के लिए भेजा गया 88 करोड़ का प्रस्ताव लटका
गौरतलब है कि फरवरी में 88 करोड़ का प्रस्ताव जल निगम ने शासन को भेजा था जिसमें 65 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। इसमें सीमा विस्तारित क्षेत्र भी शामिल है। यह कोई पहला प्रस्ताव नहीं है बल्कि इससे पहले भी प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं लेकिन शासन स्तर पर पैरवी न हो पाने के कारण आज भी यहां के लोग एक बड़ी और विकराल समस्या से जूझ रहे हैं।
कस्बे की ध्वस्त पड़ी सीवर लाइन का प्रस्ताव फरवरी में शासन को भेज गया था जो अभी फिलहाल पास नहीं हुआ है। शासन स्तर पर बैठक होनी है, उसमें प्रस्ताव पर चर्चा होनी है। वाटर सप्लाई और सीवर लाइन दोनों एक साथ डालने के सवाल पर कहा कि इस समय सरकार पेयजल पर ज्यादा फोकस कर रही है। इसे लेकर शासन से पत्राचार कर किया जाएगा कि समय से सीवर के पुनर्गठन के प्रस्ताव पर भी मोहर लग जाए तो दोनों लाइनें एक साथ पड़ जाएंगी।-
हिमांशु नेगी, अधिशासी अभियंता जल निगम
बारिश में चैंबरों से उफनाकर सड़कों पर आ जाती सीवर की गंदगी
कोंच। ध्वस्त पड़ी सीवर लाइनों की गंदगी से लोग खासे परेशान हैं। कस्बे के अधिकतर सीवर चैंबर चोक होने के कारण उनकी गंदगी नालियों के सहारे बहाई जा रही है जो बारिश में लोगों को मुसीबत में डाल देती है। पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी कस्बे की सीवर व्यवस्था लोगों को रुला रही है। जल संस्थान ने लगभग सभी चैंबरों की गंदगी सीधी नालियों में डाल दी है। जो जरा सी बारिश में सड़कों पर उफना कर फैल जाती और लोग दुर्गंध से परेशान हो जाते हैं। सड़कों पर लोगों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
सबसे पुरानी और सबसे बड़ी समस्या है सीवर
कोंच। कस्बे की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी सीवर से लोग खासे परेशान होते जा रहे है। गली-कूचों से लेकर मेन रोड तक सीवर बह रहा है लोगों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। त्योहारों पर भी इस समस्या से निजात नहीं मिल पाती है। समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि सीवर का गंदा पानी वाटर सप्लाई को भी प्रदूषित कर रहा है कस्बे के अधिकतर इलाकों में वाटर सप्लाई में प्रदूषित पानी आ रहा है और लोगों को मजबूरी में पीना पड़ रहा है।