जल संरक्षण दिवस पर विकास भवन सभागार में सोमवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने पानी का महत्व समझाया और कहा कि जल के बिना जीवन अधूरा है। मौजूदा समय में सूखा पड़ने से पानी का संकट खड़ा हो गया है। मौका है कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए हर घर से योगदान किया जाना चाहिए। वर्षा जल के संचयन पर जोर दिया
गया। खेत का पानी खेत में रहे इसके लिए किसानों को जागरूक होना पड़ेगा। जल संरक्षण दिवस पर राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। सोमवार को विकास भवन में जागरूक महिलाओं के साथ अधिकारियों व कर्मचारियों ने पानी के महत्व पर चर्चा की। इस मौके पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत जिला
विकास अधिकारी आरएस गौतम ने की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी के लिए शासन की ओर से पाइप पेयजल योजना संचालित है। खुले में रखा हुए पानी का सेवन किसी को नहीं करना चाहिए। पानी के उचित रखरखाव पर जोर देते हुए उन्होंने इसकी बचत पर भी जोर दिया। कहा कि जल संरक्षण के लिए जन जागरूकता जरूरी है। गोष्ठी में पानी की कमी बताते
हुए कहा गया कि अब समय आ गया है कि हर घर को पानी बचाने के लिए जागरूक होना पड़ेगा। पानी की जो बर्बादी घरों में हो रही है उसे रोकने के साथ वर्षा जल को संरक्षित करना होगा। नहीं तो आने वाले समय में जल पर संघर्ष तय है। गोष्ठी में स्वच्छ पानी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि प्रदूषित पानी पीने से बीमारी होने की आशंका रहती
है। वक्ताओं ने कहा कि जल का बुरी तरह से दोहन हो रहा है। इसे न रोका गया तो जल्द ही बुंदेलखंड में एक बूंद पानी नहीं मिलेगा। हैंडपंप के पास पानी को संरक्षित करने की व्यवस्था सुनिश्चित हो। बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने कहा कि उन्होंने पानी को संरक्षित करने का काम किया है। लौंगश्री ने खेत का पानी खेत में रखे जाने के लिए गीत के माध्यम से जागरूक
किया। राममूर्ति ने कहा कि महिलाओं ने जल संरक्षण पर बहुत काम किया है माधौगढ़ क्षेत्र में इसकी बानगी देखने को मिल रही है। वर्षा जल को सरंक्षित करें। इस मौके पर जल निगम के अधिशासी अभियंता सुखलाल, प्रशासनिक अधिकारी अरुण शर्मा, सहायक अभियंता हरीलाल, इं.संतोष अग्रवाल, हरीराम ओमरे, ममता गुप्ता, साधना आदि मौजूद रही।