फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jalaun News: दो घंटे सैंपल के लिए इंतजार, रिपोर्ट आएगी कल, कब होगा इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन
उरई। सरकारी इलाज के नाम पर मरीजों को इस कदर परेशान किया जा रहा है कि उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

सबसे अधिक मुश्किलें उन मरीजों को हो रही हैं जो जांच कराने जिला अस्पताल आते हैं। इन मरीजों के इलाज की प्रक्रिया एक दिन में शुरू नहीं हो पाती। यदि किसी को डॉक्टर से परामर्श के साथ अल्ट्रासाउंड, एक्सरे या खून की जांच करानी है तो यह सभी जांच एक दिन में पूरी नहीं हो सकती। इसमें दो से तीन दिन का समय लग रहा है।

जिला अस्पताल में रोजाना जांच के लिए लगभग 300 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां तीन से चार घंटे में केवल 70 से 80 मरीजों की ही जांच रिपोर्ट तैयार हो पा रही है। बाकी मरीजों को अगले दिन आने के लिए कह दिया जाता है। मरीजों ने बताया कि यदि उन्हें उसी दिन रिपोर्ट चाहिए तो सुबह आठ बजे से लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद लगभग नौ बजे पंजीकरण के लिए नंबर आता है, फिर सैंपल देने के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना होता है। तब कहीं जाकर उसी दिन रिपोर्ट मिलती है।
विज्ञापन

वहीं, सुबह 11 बजे के बाद केवल सैंपल लिए जाते हैं, रिपोर्ट नहीं दी जाती। उसके लिए मरीजों को अगले दिन फिर आना पड़ता है। इस अव्यवस्था के चलते रोजाना मरीजों के बीच नंबर को लेकर विवाद तक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जब इस मामले की पड़ताल के लिए टीम अस्पताल पहुंची, तो सच्चाई सामने आई। मरीजों को परेशान होते और स्टाफ से नोकझोंक करते हुए पाया गया, लेकिन इन अव्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखा।







यह हो सकती व्यवस्था

पंजीकरण और रिपोर्ट वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत है। इसके लिए चार से पांच काउंटर खोले जाने चाहिए, ताकि भीड़ का दबाव कम हो। सैंपल कलेक्शन के लिए पुरुषों और महिलाओं की अलग-अलग लाइन बनाई जाए, ताकि महिलाओं को धक्कामुक्की और असहजता का सामना न करना पड़े। अभी की स्थिति में महिलाएं और पुरुष एक साथ लाइन में खड़े रहते हैं, जिससे कई बार असुविधा और असुरक्षा का माहौल बन जाता है। स्टाफ यह सब देखकर भी मूकदर्शक बना है।






मरीजों की पीड़ा-


सिकरी राजा निवासी सतीश कुमार मिश्रा ने बताया कि एक घंटे तक लाइन में खड़े रहे, इसके बाद अब सैंपल के लिए बैठे हैं, लेकिन सैंपल लेने वाला बार-बार उठकर चला जाता है। समय लग रहा है और अगर देर हो गई तो डॉक्टर चले जाएंगे। फिर अगले दिन आना पड़ेगा। कोई सुनवाई नहीं है।



कदौरा निवासी लक्ष्मी देवी ने बताया कि सुबह नौ बजे आ गए थे। आधे घंटे में पर्चा बना, फिर डॉक्टर से मिले। जब जांच के लिए गए तो एक घंटे से अधिक लाइन में लगना पड़ा। सैंपल देने के बाद कहा गया कि रिपोर्ट कल मिलेगी। अब एक दिन और आना पड़ेगा। इससे अच्छा होता, कदौरा में ही जांच करवा लेते।




बिनौरा निवासी सद्दाम ने बताया कि एक घंटे से लाइन में खड़े हैं। जब तक नंबर आएगा, तब तक डॉक्टर चले जाएंगे। कमजोरी की हालत में बार-बार बैठना और खड़े होना मुश्किल है। एक मरीज का पंजीकरण 10 से 12 मिनट में हो रहा है और बाकी सबको घंटों इंतजार करना पड़ता है।



नया पटेलनगर निवासी कृष्ण मुरारी ने बताया कि दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं, अब तक सैंपल नहीं लिया गया है। दो बार गार्ड से नोकझोंक हो चुकी है। कोई सुनने वाला नहीं है। महिलाओं की लाइन में पुरुष खड़े हैं। जो जान-पहचान वाले हैं, उन्हें कर्मचारी सीधे जांच करा देते हैं।
विज्ञापन






जांच में कुछ देर हो जाती है, इसके लिए व्यवस्था की जा रही है। नई बिल्डिंग में मशीनें लगाई जाएंगी, वहां जांच होगी। पुरानी बिल्डिंग में सैंपल लिए जाएंगे। इससे भीड़ बंटेगी। साथ ही सैंपल लेने के लिए दो कर्मचारी लगाए जाएंगे, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। -आनंद उपाध्याय, सीएमएस, जिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें