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गांव से लेकर जेल तक के संदिग्धों पर नजर

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कोड़ा किर्राही में चोरी के बाद मौके पर मौजूद पुलिस। - फोटो : ORAI
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उरई/सिरसाकलार। क्षेत्र के गांव कोड़ा किर्राही के मंदिर से चोरी गई बेशकीमती मूर्तियों की बरामदगी के लिए पुलिस गांव के गंजेड़ियों से लेकर जेल में बंद व हाल ही में छूटे अपराधियों पर अपनी नजरें जमाए है। पुलिस ने गांव के कुछ संदिग्धों को उठाया भी है, जिन्हें मंदिर में अक्सर गांजा पीते देखा जाता था। इसके अलावा मंदिर के महंत, पुजारी व मौके पर मौजूद दिव्यांग से भी पूछताछ की जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ एके सिंह का कहना है कि पुलिस, सर्विलांस और एसओजी की टीमें जांच में लगी है, जल्द ही खुलासा भी किया जाएगा।
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बता दें कि शनिवार की देर रात गांव स्थित मंदिर से राम जानकी, लक्ष्मण की मूर्तियां और लड्डू गोपाल की मूर्ति व सिंहासन आदि चोरी हो गए थे। जिनकी कीमत करीब एक करोड़ के आसपास बताई जाती है। मामला प्रकाश में आते ही पुलिस के हाथ पांव फूल गए थे। आनन फानन में अधिकारी फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। मंदिर से कुछ दूरी पर ही जांच के दौरान भगवान के कुछ कपड़े भी मिले थे। वैसे जिले दो साल के भीतर एक बार बैंक डकैती व एक बार प्रयास हो चुका है। इसके अलावा कई बड़ी चोरियां भी हुई हैं। जिनके आरोपी अभी भी जेल में हैं तो कुछ छूट चुके है।
इसका पता लगाने के लिए पुलिस जेल प्रशासन से भी मदद ले रही है। वहीं ग्रामीणों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि मंदिर अक्सर गांव के ही कुछ लोग गांजा पीते देखे जाते थे, पुलिस उनका पता लगाकर उनसे भी पूछताछ कर रही है। इसके अलावा महंत सुबेश अवस्थी, उनके भाई दिनेश अवस्थी, पुजारी बाबूराम व चोरी की रात मंदिर परिसर में मौजूद दिव्यांग सर्वेश अवस्थी व उनके नाते रिश्तेदारों को भी पूछताछ के दायरे में लाया जा रहा है। एएसपी का कहना है कि फिलहाल महंत की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ चोरी की मामला दर्ज किया गया है। मामला गंभीर है, पुलिस के पास कुछ सुराग भी है, जल्द ही उनके परिणाम भी सामने होंगे। पुलिस ने सोमवार को भी मंदिर के आसपास लोगों से पूछताछ कर कुछ संदिग्धों को उठाया है।
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अमखेड़ा चोरी के आरोपियों से होगी पूछताछ
करीब डेढ़ साल पहले ठीक इसी तरह जालौन कोतवाली स्थित अमखेड़ा गांव के प्राचीन मंदिर से भी भगवान राम जानकी की कीमती मूर्तियां चोरी हुई थी। घटना के कुछ दिन बाद ही पुलिस ने चार पांच शातिर चोरों को पकड़कर उनसे मूर्तियां भी बरामद की थी। सभी आरोपियों पर गैंगस्टर लगा था, इनमें से एक कानपुर का भी था। जल्द ही पुलिस की एक टीम जेल में बंद इन शातिर चोरों से भी पूछताछ करेगी।
गांव के भीतर ही हो सकती हैं मूर्तियां
जिस तरह मंदिर के मेन दरवाजा तोड़कर मूर्ति चोर दाखिल हुए और फिर पीछे के रास्ते से भागे, इससे एक बात तो साफ है कि चोरी में किसी मंदिर के जानकार का ही हाथ है। वह मंदिर परिसर से लेकर गांव तक के किसी घर का सदस्य हो सकता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार भगवान के कपड़े पास ही में मिले, इससे यह भी तय है कि अभी मूर्तियां गांव के ही भीतर होने की पूरी संभावना है। उन्हें कहीं न कहीं गड्ढा खोदकर गाड़ा गया होगा।
सराफा बाजार में सक्रिय किए गए मुखबिर
मामले के खुलासे के लिए पुलिस भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सिरसाकलार ही नहीं बल्कि जनपद व पड़ोसी जिले के बड़े सराफा कारोबारियों के बीच कुछ मुखबिर भी लगाए गए हैं, जो कि मूर्तियां का सौदा होते ही पुलिस को खबर करेंगे। जिससे घटना के खुलासे में तनिक भी देर नहीं लगेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चोरों का सराफा कारोबारियों से संपर्क करने में कुछ वक्त जरूर लग सकता है लेकिन बेचने के लिए संपर्क जरूर करेंगे।
पुलिस तो भूल गई बाबा का छत्र व मुकुट
अमखेड़ा और सिरसाकलार की तरह करीब एक साल पहले कालपी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आटा हाईवे के पास स्थित भगवान सांई के मंदिर से भी उनका कीमती मुकुट व छत्र चोरी हो गया था। कुछ दिनों तक तो कालपी व आटा दोनों ही थानों की पुलिस ने खुलासे के लिए खूब हाथ पैर मारे, बाद में सीमा विवाद के चलते जांच भी ठंडी हो गई। मंदिर के पुजारी पुत्ती लाल का कहना है कि पुलिस तो लगता है कि सांई मंदिर की चोरी ही भूल गई है।
प्राचीन मंदिरों में नहीं सुरक्षा के इंतजाम
जनपद में कालपी से लेकर एट तक के बीच दर्जनों प्राचीन मंदिर है, जहां बेशकीमती मूर्तियां आज भी रखी हुई है। कई मंदिर तो सुनसान में भी पड़ते हैं, इसके बाद भी वहां पर इन कीमती मूर्तियों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। पुलिस भी इन मंदिरों तक तभी पहुंचती है जब कभी कोई घटना होती है। मंदिर के जिम्मेदारों का कहना है कि थाना क्षेत्र के स्तर पर मंदिरों में भी मूर्तियों की सुरक्षा के कुछ तो उपाय होने ही चाहिए।
बिन भगवान ग्रामीण भी नहीं रख रहे पांव
गांव वाले सोमवार को मंदिर परिसर के आसपास तो रहे लेकिन बिना भगवान की मूर्तियों के उन्होंने भीतर पैर रखना ठीक नहीं समझा। मंदिर के जिम्मेदारों ने ही साफ सफाई व पूजा अर्चना की खानापूरी की। भगवान का सिंहासन भी खाली पड़ा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मूर्तियां चोरी होने का बहुत दुख है। जिस मंदिर में भगवान की श्रद्धा भाव लेकर जाते थे, आज वहां वहीं नहीं है तो मन ही नहीं कर रहा है भीतर जाने का।

आटा स्थित सांई मंदिर पर जानकारी देता पुजारी।- फोटो : ORAI

क़ोड़ा किर्राही में खाली पड़ा मंदिर।- फोटो : ORAI

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