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चार सौ साल पुराने कुएं में पचास फुट पर पानी

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रामपुरा। हर साल गर्मी में पेयजल संकट के लिए हो हल्ला मचता है। जलस्तर गिरने से हैंडपंप जवाब दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्राचीन कुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यदि इनकी दशा सुधारी जाए तो बीहड़ में पानी की समस्या का समाधान हो सकता है। ऐसा ही एक कुंआ माधौगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम जगम्मनपुर राजमहल के सामने स्थित है। इलाकाई लोगों का कहना है कि सागर कुएं के नाम से इसकी पहचान है। आज भी पचास फुट पर पानी उपलब्ध है। पर देखरेख के अभाव में कुआं जीर्णशीर्ण है। इसका पानी भी पीने लायक नहीं बचा है।
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बताते चलें कि 16वीं सदी के अंतिम समय में जब जगम्मनपुर के राजमहल का निर्माण हो रहा था। तब तत्कालीन महाराजा जगम्मनदेव के अनुरोध पर गोस्वामी तुलसीदास आए थे। उस दौरान जगम्मनपुर गांव की स्थापना हो रही थी। अपने नव स्थापित नगर की प्रजा के लिए जलापूर्ति की चिंता तत्कालीन राजा के मन में थी। उन्होंने तुलसीदास से कुआं खोदने के लिए स्थान चयन करने का अनुरोध किया। तो उन्होंने किले के उत्तरी भाग में कुआं निर्माण करने को कहा। राजाज्ञा से कुआं खोदा जा रहा था पर पानी न निकलने पर राजा ने चिंता व्यक्त की। राजा जगम्मनदेव की चिंता देख गोस्वामी तुलसीदास के समीप विराजमान पंचनद स्थित आश्रम के सिद्ध संत श्रीमुकुंदवन, बाबा साहब महाराज ने अपने कमंडल से उस सूखे कुएं में जल डाला। ऐसा करते ही वहां से जलधारा फूट पड़ी। तत्काल पत्थर और चूना कुआं में डलवा कर नीचे के जल स्रोतों को रोका तब संतों, गोस्वामी तुलसीदास एवं महाराज मुकुंदवन ने कुएं को सागर नाम दिया। बता दें कि यूं तो जगम्मनपुर में प्रत्येक गांव में 100 फुट की गहराई पर ही पानी है लेकिन जगम्मनपुर के सागर कूप में मात्र 55.60 फुट पर अपार जल है। विशाल कुआं जल से तो अभी भी लबालब है किंतु लगभग 50 वर्षों से कोई देखरेख न होने से अब खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है ।
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फोटो-02 बाबूराम
स्नान से तीर्थ सा पुण्य
क्षेत्र के बुजुर्ग बाबूराम के मुताबिक मान्यता है कि इस कुएं में पंचनद का पवित्र जल स्रोत है। इसके जल से स्नान करने से तीर्थों में स्नान का पुण्य प्राप्त होता है। लिहाजा इसकी अनदेखी नही की जानी चाहिए।
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फोटो-03 राघवेंद्र
संरक्षित करना जरूरी
जगम्मनपुर निवासी राघवेंद्र का कहना है कि क्षेत्र में हर साल पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। जबकि प्राचीन सागर कूप असीमित जल का स्रोत है। इसे संरक्षित कर भविष्य की संभावित पेयजल समस्या से बचा जा सकता है ।
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फोटो-04 ओम प्रकाश
कुआं वाकई ऐतिहासिक है। इसलिए इसकी देखरेख जरूरी है। प्रयास किया जाएगा कि इस बार क्षेत्र के विकास कार्यों में इसके जीर्णोद्वार को भी शामिल किया जाए, ताकि इसके महत्व को आने वाली पीढ़ी के लोग भी जान सके।
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ओम प्रकाश, खंड विकास अधिकारी
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