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परम्पराओं को तोड़, किया विधवा से पुनर्विवाह

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मुसमरिया में राम जानकी मंदिर मे पुनर्विवाह मौके पर वर वधू को आशीर्वाद देते लोग - फोटो : ORAI
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महेवा (जालौन)। महेवा ब्लॉक के चुर्खी थाना क्षेत्र के ग्राम मुसमरिया में सामाजिक रूढ़ीवादी परंपराओं से बाहर निकल कर क्षत्रिय समाज के एक युवक ने नई परंपरा की नींव डाली। रविवार को गांव के के रामजानकी मंदिर मे युवक ने विधवा से पुनर्विवाह किया। इस विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में रही। युवक की इस पहल को खूब सराहा जा रहा है। इससे पहले चौरासी क्षेत्र के क्षत्रिय समाज में पुनर्विवाह को अभिशाप माना जाता था। हालांकि इस साल इस क्षेत्र में हुआ यह तीसरा विधवा विवाह है।
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जिले में चौरासी क्षेत्र कालपी से लेकर कुठौंद तक फेला है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में क्षत्रिय समाज के 84 गांव होने से इसे चौरासी नाम मिला था। हालांकि समय के साथ कुछ गांव इस इससे अलग हुए। इन गांवों में आजादी के इतने साल बाद अभी भी कुछ कुरीतियों की वजह से इस क्षेत्र में विधवा विवाह को अभिशाप माना जाता है। बीच में समाज के कुछ जागरूक लोगों ने इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद की, लेकिन जागरूकता के अभाव में आवाज का असर नहीं दिखा। अब बदलते दौर में 84 क्षेत्र को इस अभिशाप से मुक्ति मिली। क्षेत्र में विधवा विवाह को मान्यता मिली। इस साल क्षेत्र में दो विधाओं का विवाह हो चुका है। रविवार को इस नई परंपरा में एक और अध्याय और जुड़ गया। रूरा अड्डू निवासी प्रधान नरेंद्र सिंह के पुत्र धर्मेंद्र सिंह ने वोहदपुरा निवासी करण सिंह की बेवा पुत्री रेनू से मुसमरिया के रामजानकी मंदिर में अग्नि के सात फेरे लेकर उसे जीवनसंगिनी बना लिया। इस कार्य की क्षत्रिय समाज में भूर भूर प्रशंसा की गई। बताते चलें कि रेनू की शादी 11 साल पहले रूरा अड्डू निवासी वीरपाल सिंह के पुत्र पवन सिंह के साथ हुई थी। पवन सिंह ने 2011 में आत्महत्या कर ली थी। समाज के लोक लाज के भय से रेनू बेवा का जीवन गुजार रही थी। धर्मेंद्र ने रेनू का हाथ थाम कर एक नई परंपरा को जन्म दिया है। इस मौके पर सुरेंद्र सिंह सरसेला, सुदामा सिंह, डॉक्टर नवाब सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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