मुहम्मदाबाद। सरकार भले ही गांव शहरों को भरपूर बिजली देने का दावा कर रही हो पर हकीकत में सब उलटा है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था तो अधिकारियों और कर्मियों की मनमानी पर चल रही है। जिसके चलते ग्रामीण इलाकों को कभी फाल्ट के नाम तो कभी कटौती के कारण 7 या 8 घंटे ही आपूर्ति मिल रही है। जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी का भी संकट बढ़ गया है।
डकोर ब्लाक के कुसमिलिया गांव में स्थापित बिजली विभाग का उपकेंद्र इसकी एक बानगी है। क्षेत्र के 10-12 गांवों को बिजली सप्लाई दी जाती है। कर्मचारियों की लापरवाही से इन गांवों को बिजली रोस्टर प्रणाली से भी कम मिल रही है।
कुसमिलिया पावर हाउस से ऐरी, रामपुरा, मुहाना, मकरेछा, बंधौली, गुढ़ा, सिमिरिया, मुहम्मदाबाद आदि 13 गांवों को रोस्टर से भी कम बिजली मिल रही है। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। पावर हाउस पर 4 एसएसओ की तैनाती है। इसमें ड्यूटी बदलाव के साथ चौबीस घंटे एक एसएसओ का रहना अनिवार्य है। बिजली का फाल्ट सुधारने के लिए सात लाइन मैन भी हैं। बावजूद इसके फाल्ट होने पर कोई घंटों नहीं आता है। एसएसओ राकेश का कहना है कि रात की ड्यूटी के कर्मियों की ओर से लापरवाही की शिकायत मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कर्मी फोन नहीं उठाते हैं। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है। जल्द ही कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारी जाएगी।