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एक्सप्रेस वे पर सुबह वाहनों ने भरा फर्राटा, दोपहर बाद बंद

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बुंदेलखंड एक्प्रेस वे को बड़ागांव के पास कट को बंद कर दिया गया। ये कट चित्रकूट की ओर से आकर झांसी क - फोटो : ORAI
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उरई। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर रविवार को वाहनों ने फर्राटा भरा। दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही रही। हालांकि शुरुआत का पहला दिन होने के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या कम ही रही। दोपहर बाद कैथेरी गांव के पास बने एक्सप्रेसवे के कट को बंद कर दिया गया। यहां पर पड़े अधूरे कामों को पूरा करने में कर्मचारी जुटे रहे। डकोर के पास भी सर्विस लेन और कट पर यूपीडा की टीम काम करती रही। यूपीडा के अधिकारियों के मुताबिक एक्सप्रेसवे जनता के लिए शुरू हो चुका है।
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14,800 करोड़ की लागत से बने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का लोकार्पण शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। लोकार्पण के दूसरे दिन आम लोगों ने एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरना शुरू कर दिया गया। एक्सप्रेसवे पर पहुंचने और यहां से झांसी रोड पर उतरने के लिए कैथेरी और डकोर के पास भी कट बनाया गया है। दोपहर तक तो एक्सप्रेसवे पर वाहन फर्राटा भरते रहे, लेकिन दोपहर बाद दोनों जगह के कटों को बंद कर दिया गया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अधूरे कामों को पूरा करने के लिए ऐसा किया गया है। यूपीडा से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि एक्सप्रेसवे जनता के लिए खोल दिया गया है। इस पर सफर करने की कोई मनाही नहीं है। छोटे-छोटे बचे काम चलते रहेंगे।
बिना टोल टैक्स दिए चलेंगे वाहन
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर अभी बिना टोल टैक्स चुकाए वाहन चलेंगे। कैथेरी के पास टोल प्लाजा बनाने का काम तेजी से चल रहा है। यूपीडा के एक अधिकारी ने बताया कि टोल शुल्क लागू करने से पहले इसकी घोषणा की जाएगी। तब तक एक्सप्रेसवे पर सफर टोल मुक्त रहेगा।
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पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट बनने में समय लगेगा
एक्सप्रेसवे पर चार पेट्रोल पंप और चार रेस्टोरेंट भी खुलेंगे। पेट्रोल पंपों पर वाहन की मरम्मत की सुविधा भी होगी। राहगीरों के लिए मिडवे रेस्टोरेंट भी खोले जाएंगे। एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग वाहन और मेडिकल सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। हालांकि इन सुविधाओं को पूरा होने में अभी चार से छह माह का समय लग सकता है।
बोले ट्रक चालक
चार घंटे और 50 लीटर डीजल बचेगा
इंदौर से ट्रक लोड करके बरेली जा रहे ट्रक चालकों ने कैथेरी के पास बने कट से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सफर शुरू किया। यहां पर टोल प्लाजा पर कुछ देर खड़े होकर उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जायजा भी लिया।
इस दौरान ट्रक चालक सोनू भदौरिया ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर सफर की वजह से उनका चार घंटे का समय बचेगा और कम से कम 50 लीटर डीजल की बचत होगी। वाहनों की मरम्मत का खर्च भी घटेगा।
एक अन्य ट्रक चालक राजेश ने बताया कि आजकल सड़कों पर सबसे अधिक तो मवेशियों से दिक्कत होती है। एक्सप्रेसवे पर मवेशी न होने से वाहन चलाने में आसानी रहेगी। थकान नहीं होगी।
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हाथ कागज उद्योग को उम्मीद बंधी, सपने पूरे होना बाकी
- उद्यमी बोले, निवेश बढ़ने और सरकारी संरक्षण से कारोबार को मिलेगा पुराना गौरव
फोटो-22-कालपी का तैयार हाथ कागज। संवाद
फोटो-24-हाथ कागज के लिए माल तैयार करता कारीगर। संवाद
शरद खन्ना
कालपी। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की शुरुआत से राहगीरों से कहीं ज्यादा कालपी के हाथ कागज उद्योग से जुड़े उद्यमियों में खुशी है। उन्हें उस बात की उम्मीद है कि एक जिला, एक उत्पाद योजना में चयनित इस उद्योग के विकास का भी रास्ता खुलेगा। हालांकि इस उम्मीद के परवान चढ़ने पर अभी आशंका के बादल छाए हैं। अब तक शासन स्तर से हाथ कागज उद्योग को कोई संरक्षण या बढ़ावा नहीं मिला है। ऐसे में उद्यमियों ने सरकारी संरक्षण से निवेश बढ़ने पर ही इस काम को पुराना गौरव मिलने की बात कही है।
देश-विदेश में धूम मचा चुके कालपी के हाथ कागज उद्योग को अब सरकारी मदद की दरकार है। मिल मेड पेपर ने हैंडमेड पेपर उद्योग को बहुत नुकसान पहुंचाया है। शासन स्तर से सरकारी कार्यालयों में हैंडमेड पेपर प्रयोग किए जाने के निर्देश भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सके हैं। यह हाल तब है जब अकेले कालपी में ही हाथ कागज उद्योग की लगभग 100 इकाइयां हैं। 10 से 12 हजार लोग इससे जुड़े हुए हैं। हाथ कागज उद्योग के विकास के लिए जब सरकार ने एक जिला, एक उत्पाद योजना में इसका चयन किया तो इसके विकास की उम्मीद बंधी। हालांकि इसके बाद भी हाथ कागज उद्योग की हालत नहीं बदली। यह अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। शासन स्तर से संरक्षण न मिलने से दर्जनों इकाइयां बंदी के कगार पर हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बन जाने से उद्यमियों की उम्मीदें फिर जागी हैं। हालांकि इन्हें पूरा होने की अड़चनों से भी उद्यमी वाकिफ है। आने-जाने की सुविधा के साथ उद्योग पनपे, इस पर भी सरकारों को ध्यान देना होगा। (संवाद)
फोटो-25-नरेंद्र तिवारी।
जमीनी लाभ मिलना बाकी
हाथ कागज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लोकार्पण के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी को सूर्य मंदिर का चित्र भेंट किया है। यह चित्र कालपी के हाथ कागज पर ही उकेरा गया है। पीएम मोदी के जिले में आगमन पर ओडीओपी योजना की चर्चा तो हुई, पर इस योजना से जुड़े किसी भी उद्यमी को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। अभी तक ओडीओपी योजना सिर्फ सरकारी फाइलों व भाषणों में चल रही है।
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उद्यमियों की प्रमुख मांगें
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1- सरकारी खरीद में आरक्षण तय होना चाहिए। जैसा कुम्हारी कला, माटी व कालीन उद्योग में है।
2- पावरलूम उद्योग की तरह बिजली की दरों में सब्सिडी।
3- जब ओडीओपी में यह उद्योग है तो यूपी एक्सपोर्ट का हब जिले में ही खोला जाना चाहिए। पहले करोड़ों रुपये का एक्सपोर्ट होता था व बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आती थी।
4- जीएसटी की दरों में कमी की जानी चाहिए। जीएसटी की दरें 12 से 18 प्रतिशत हैं, जो पांच प्रतिशत होनी चाहिए।
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हाथ कागज के उपयोग
हाथ कागज से सरकारी दफ्तरों में उपयोग होने वाले फाइल कवर, कैरी बैग, टैग पेपर, फिल्टर पेपर, लिफाफे, शादी के कार्ड, विजिटिंग कार्ड आदि बनते हैं। इसके अलावा पल्फ शीट भी इसी कागज से बनती है, जो टिन की चादरें बनाने के काम आती है।
फोटो संख्या-14-बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर बड़ागांव के पास बने कट को किया गया बंद। यह कट चित्रकूट की ओर से आकर झांसी की ओर उतरने वाहनों के लिए कट बनाया गया है। संवाद
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फोटो संख्या-15- डकोर के पास एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए बनाए गए कट को बंद कर दिया गया। यहां अभी काम होना बाकी है। संवाद
फोटो संख्या-16-डकोर के पास सर्विस लेन पर किया जा रहा काम। संवाद
फोटो संख्या-18-कैथेरी के पास वाहनों का वजन तौलने के लिए लगाया जा रहा इलेक्ट्रानिक कांटा। संवाद
फोटो संख्या-19- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सुबह वाहनों ने भरा फर्राटा। कैथेरी टोल प्लाजा पर ट्रक चालकों ने बताए अपने अनुभव।
फोटो संख्या-20- ट्रक चालक सोनू भदौरिया। संवाद
फोटो संख्या-21- ट्रक चालक राजेश। संवाद
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