दरगाह मीर सैयद मुहम्मद तिरमिजी के 367वें सालाना उर्स के अवसर पर परंपरागत तरीके से विशाल चादर जुलूस ए मुहम्मदी शुक्रवार को सड़कों से निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों का विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक, व्यापारिक संगठनों व हिंदू भाइयों ने शर्बत व मिठाई खिलाकर स्वागत किया। जुमे की नमाज के बाद विभिन्न अंजुमन व मदरसों के
बच्चे इस्लामी परचम व चादर लेकर मनीगंज मोहल्ले स्थित हजरत मखदूम साहब के आस्ताने पहुंचकर एकत्रित हुए। गौसिया कमेटी दावते इस्लामी मदरसा गौसिया मजीदिया, मदरसा खानकाह दारुल उलूम, मदरसा शाह जमालुल उलूम मीर तिरमिजी आदि के छात्र अपने अपने हाथों में बैनर व झंडे लेकर रवाना हुए। अकीदतमंद नात पढ़ते हुए चल रहे थे। 3
बजे शुरू हुआ चादर जुलूस ए मुहम्मदी कोतवाली गेट, दुर्गा मंदिर हाईवे चौराहा, हरीगंज चौराहा, जुलैहटी चौराहा, फुलपावर चौराहा, डाकघर, टरननगंज, सब्जी मंडी होकर शाम 7 बजे खानकाह दारुल उलूम पहुंचा, जहां अकीदतमंदों ने दरगाह में फूल व चादर चढ़ाकर मन्नतेें मांगी। खानकाह मुहम्मदिया के सज्जादा नशीन, सैयद ग्याशुदद्ीन मियां, मुफ्ती शहर
मौलाना अशफाक अहमद, कारी शमशुद्दीन रहमानी, पालिकाध्यक्ष कमर अहमद, पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान, हाफिज मुहम्मद इरशाद आदि मौजूद रहे। खानकाह दरगाह से जुड़ी 17 कमेटियों ने उर्स को लेकर बेहतर तैयारियां की है। सजावट व रंगीन रोशनी से चमचमाती दरगाह परिसर में हजारों जायरीनों, अकीदतमंदों ने फूल, चादर चढ़कर फातिहा पढ़ी। मुल्क व
कौम की तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी। उर्स में जायरीनों की भीड़ को देखते हुए एसडीएम जलराजन चौधरी, सीओ मनोज कुमार, कोतवाल सत्येंद्र सिंह भ्रमणशील रहे। कुठौंद एसओ चंद्रशेखर दुबे, सिरसा कलार एसओ सत्यदेव सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
तेरी रहमत के तलबगार खडे़ हैं...
तीन दिवसीय सालाना उर्स आलिया मोहम्मदिया धूमधाम से मनाया जा रहा है। उर्स की पहली रात में दरगाह परिसर में आयोजित आल इंडिया नातिया मुशायरे में मुल्क के मशहूर शोअरा इकराम ने अपने-अपने कलाम पेश कर जायरीनों, अकीदतमंदों व श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सज्जादानशीन सैयद ग्याशुद्दीन मियां की सरपरस्ती में आयोजित मुशायरे में
मशहूर शायर जम-जम फतेहपुरी ने कहा, मौला तेरी रहमत के तलबगार खडे़ हैं, महबूब की चौखट पे गुनहगार खडे़ हैं। क्या नात लिखे हजरत ए हस्सान केे आगे। शान ए काबा पर जिक्र करते हुए शहबुद्दीन शर्फ ने कहा कि कोई हमसे ये न पूछे, क्या क्या देख लेते हैं, वक्त एक ही तसव्वर में मदीना देख लेते हैं। शहनबाज हसन ने यूं पढ़ा, अल्लाह रब ए इज्जत कर पता बता
रहे हैं, बंदों को मेरे उनका रब से मिला रहे हैं। झारखंड से आए शम्स तवरेज ने महफिल को आगे बढ़ाते हुए सुनाया, ये रब दिखा दे, जलबा ए रुखशारे मुस्तफा, मागूंगा फिर दुआ न कभी इस दुआ के वादा। शायर युनुस फैजी ने नारे तकदीर अल्लाहो अकबर के बुलंद नारों के बीच कहा कि चांद सितारे से भी रोशन तलबा मेरे आका, अल्लाह जाने कैसा होगा
चेहरा मेरे आका। शायद पैकर ने कहा कि सीना सजा है, इश्क है ये तमाशा नहीं है, वो भी दिल है जहां में, जिसमें तस्वीर तैबा नहीं है। मुशायरे में दिलवर शाही, जमजमो कौसर, सलमान रजा ने कलाम पेश किए। संचालन सिराज तबानी ने किया। खानकाह मुहम्मदिया दारुल उलूम के प्रिंसिपल मौलाना अशफाक अहमद बरकाती, हाफिज मुहम्मद इरशाद, मुजीब अल्लामा, अपर पुलिस अधीक्षक शकील खां मौजूद रहे।