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Jalaun News: प्रधानी चुनाव के वर्चस्व में की गई थी दो सगे भाइयों की हत्या

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उरई। 31 साल पहले सगे भाइयों की गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पूर्व बसपा विधायक को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। उन्हें 11 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी। यह घटना प्रधानी के प्रधानी चुनाव के वर्चस्व को लेकर हुई थी। मामले में दस लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाकी आरोपियों को कोर्ट से स्टे मिल गया था।
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चुर्खी थाना क्षेत्र के बिनौरा बैध गांव में 30 मई 1994 की दोपहर साढ़े बारह बजे प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर गांव के ही राजकुमार उर्फ राजाभइया व जगदीश शरण की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। राजकुमार और जगदीश के भाई राम कुमार ने थाना पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि 30 मई 1994 को वह अपने कोठी वाले मकान के बरामदे में बड़े भाई जगदीश शरण, राज कुमार उर्फ राजा भैया, भतीजे कुलदीप कुमार, जीजा रामेंद्र सेन व गांव के ही वीरेंद्र सिंह व राम करन तिवारी के साथ बैठकर बातचीत कर रहा था।
इसी दौरान गांव के ही रुद्रपाल सिंह उर्फ लल्ले गुर्जर, राजा सिंह, संतावन सिंह गुर्जर, करन सिंह उर्फ कल्ले व दो अज्ञात उसके फाटक के अंदर घुस आए। सभी लोग हाथों में बंदूकें व राइफल लिए थे। रुद्र ने चिल्लाकर कहा कि सभी को घेर लो कोई जिंदा न बच पाए। इसके बाद इन लोगों ने बंदूक और राइफलों से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसके भाई राजकुमार उर्फ राजा भइया व जगदीश की मौके पर ही मौत हो गई थी। वीरेंद्र घायल हो गया था।
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वादी की ओर से अधिवक्ता श्याम द्विवेदी ने बताया कि रुद्रलाल उर्फ लल्ले को प्रधानी का चुनाव लड़ना था। गांव के ही प्रधान जगदीश शरण श्रीवास्तव से कई बार कहासुनी हुई थी। इसी को लेकर राजकुमार उनसे रंजिश मानने लगे थे। इसी को लेकर पूरी घटना को अंजाम दिया गया था। विवेचना में पूर्व विधायक के शामिल होने के सबूत मिले थे। इस पर विवेचक ने आरोप पत्र दाखिल किया था।
पुलिस की विवेचना में दोहरे हत्या कांड में छोटे सिंह व अखिलेश कृष्ण मुरारी, बच्चा सिंह, छुन्ना सिंह के नाम शामिल किए गए थे। 18 फरवरी 1995 को सभी आरोपियों का मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायालय मेंं शुरू हुआ था। वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर कालपी विधान सभा से छोटे सिंह चौहान विधायक बन गए थे।
हाईकोर्ट से जमानत होने के बाद केस को उत्तर प्रदेश सरकार एवं राज्यपाल द्वारा वापस लिया गया था। छोटे सिंह की पत्रावली अपर सत्र एफटीसी से दिनांक 19 मई 2005 से समाप्त कर दिया गया। वादी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां से राज्यपाल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया और एमपी एमएलए कोर्ट में शीघ्र सुनवाई का आदेश दिया था। इसी में सोमवार छोटे सिंह चौहान को दोषी करार किया गया है। अब फैसला 11 दिसंबर को सुनाया जाएगा।



छात्र संघ अध्यक्ष होने की वजह से हो गई थी दोनों की गहरी दोस्ती
उरई। रुद्रपाल सिंह सिंह उर्फ लल्ले गुर्जर उस समय जगदीश के घर पर उरई में ही रहा करते थे। दोनों के परिवारों में भी खासा संपर्क हो गया था। इसी दौरान छात्र संघ के चुनाव में लल्ले गुर्जर को अध्यक्ष चुन लिया गया था। वहीं कालपी कॉलेज से छोटे सिंह अध्यक्ष बन गए थे। इसी को लेकर छोटे सिंह व लल्ले की गहरी दोस्ती हो गई थी।
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