उरई। अब क्षय रोग व तंबाकू नियंत्रण विभाग मिलकर काम करेंगे। टीबी के ऐसे रोगी जिन्हें नशे की लत है, उनकी तंबाकू नियंत्रण कक्ष में काउंसलिंग की जाएगी। इसी प्रकार नशे के ऐसे रोगी जो संभावित टीबी रोगी हो सकते हैं, उनकी टीबी जांच होगी। जांच के बाद यदि उन्हें टीबी निकलती है तो उनकी काउंसलिंग कर इलाज शुरू किया जाएगा।
शुक्रवार को जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम और जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की बैठक में टीबी अस्पताल में हुई बैठक में सीएमओ डॉ ऊषा सिंह ने कहा कि भारत को क्षय रोग से मुक्त करने के लिए सभी लोगों की सहभागिता जरूरी है। टीबी और नशा मुक्ति के लिए अब दोनों विभागों को आपस में सामंजस्य कर काम करना है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ सुग्रीव बाबू ने कहा कि पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई विभागीय बैठक के बाद क्षय रोग विभाग और तंबाकू नियंत्रण इकाई को मिलकर काम करने को कहा गया है। कहा कि नशे की लत के कारण कई लोग खानपान पर ध्यान नहीं देते है। इससे वह दमा जैसी बीमारी का शिकार हो जाते हैं। कुछ उनमें टीबी रोगी भी हो जाते है। ऐसे रोगियों का चिह्नित कर उनका इलाज शुरू किया जाएगा। साथ ही उन्हें नशा मुक्ति के लिए तंबाकू नियंत्रण कक्ष में भेजकर उनकी काउंसलिंग भी कराई जाएगी। वहीं कोई मरीज नशा मुक्ति के लिए तंबाकू नियंत्रण कक्ष में पहुंचता है और वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को लगता है कि वह टीबी का संभावित रोगी हो सकता है तो उसकी टीबी जांच कराई जाएगी।
जिला तंबाकू नियंत्रण इकाई की सलाहकार तृप्ति यादव ने बताया कि सिगरेट व अन्यक तंबाकू उत्पाद अधिनियम के माध्यम से तंबाकू नियंत्रण कानून को मजबूत करने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। बैठक में महेश कुमार, कुलदीप, अश्वनी,आलोक मिश्रा, संजय अग्रवाल, राजीव उपाध्याय, नुरुल हुदा, अहमद शादाब, ब्रजेंद्र, शहनवाज आदि मौजूद रहे।