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तिरंगा शान है अपनी इसे झुकने नहीं देंगे

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कोंच। वागीश्वरी साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी श्री द्वारिकाधीश मंदिर में हुई। काव्य गोष्ठी में कवियों और साहित्यकारों ने देश की आन-बान और शान तिरंगे को देश की आत्मा और स्वाभिमान बताते हुए इसकी शान में गुस्ताखी करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शने का संदेश दिया कवि नंदराम स्वर्णकार भावुक ने, वतन की आबरू हम कभी लुटने नहीं देंगे, तिरंगा शान है अपनी इसे झुकने नहीं देंगेे।
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संस्था अध्यक्ष ओंकारनाथ पाठक की अध्यक्षता और आशाराम मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में काव्य गोष्ठी का शुभारंभ संतोष तिवारी ने सरस्वती वंदना से किया। शायर प्रेम चौधरी नदीम ने रचना पाठ किया, तिरंगे की आन-बान-शान को नमन, सरहदों के रक्षम वीर जवानों को नमन। भास्कर सिंह माणिक्य ने सुनाया- विश्व से महान भारत का लोकतंत्र, सर्वे भवंतु सुखिना भारत का मंत्र।
मुन्ना यादव विजय ने पढ़ा-जब जनता पर जुल्म का कहर जारी था, गुलामी का बोझ हर आदमी पर भारी था। ओंकारनाथ पाठक ने व्यंग्य पढ़ा-कल पीने के बाद हद हो गई यारो, होटल समझ कर अदालत चला गया। संतोष तिवारी सरल ने अपनी रचना में कहा, सदियों विष के घूंट पिए हैं जाने कितने दर्द जिए हैं, देश पर सब न्यौछावर करके हम स्वतंत्र गणतंत्र हुए हैं। इस दौरान अमर सिंह यादव, संतोष राठौर, पप्पू चौधरी, मुन्नालाल अग्रवाल,चंद्रशेखर आदि मौजूद रहे।
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उधर, ब्राह्मण महासभा परिसर में शुक्रवार को कवि सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। कवि सुनीलकांत तिवारी ने रचना पढ़ी-सफर खादी का आ पहुंचा है बोलेरो से पजेरो तक, है जिसकी जेब में पैसा हुई उसकी सियासत है। दिनेश मानव ने रचनापाठ किया, मन के मंदिर में कुछ प्रकाश करो, अपने अंदर भी कुछ तलाश करो। साहित्यकार नरेंद्र मित्र, कवि राजेंद्र सिंह रसिक, संजय सिंघाल, राघवेंद्र चिंगारी, आनंद शर्मा अखिल आदि ने भी रचनाएं पढ़ी। इस दौरान अनुरुद्घ मिश्रा, संजय रावत, ब्रजमोहन तिवारी, किशोर सिंह यादव, रूपेश तिवारी, रवि दीक्षित आदि रहे।
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