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टिकटों का निरस्तीकरण बढ़ा, काउंटर पर हुई कैश की किल्लत

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स्टेशन पर टिकट काउंटर खाली पड़ा - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। कोरोना का असर रेल की आय पर भी दिखाई दे रहा है। ट्रेनों की आवाजाही तो है पर ट्रेनों से यात्री नदारत दिखाई दे रहे है। जितनी संख्या में मुसाफिर यात्रा नहीं कर रहे है, उससे बड़ी संख्या में यात्री यात्रा रद्द कर रहे है। हालत ये है कि टिकट वापसी के लिए रेलवे के आरक्षण व टिकट काउंटर पर पैसों की किल्लत शुरू हो गई है। पैसे वापसी के लिए यात्रियों को काउंटर पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है।
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कोरोना वायरस के मद्देनजर लोग यात्रा से परहेज कर रहे हैं। जिन लोगों ने अग्रिम टिकट बुक करा लिए थे, वे अब टिकट वापसी के लिए लाइन लगाए हैं। हालत यह है कि जिन ट्रेनों में मई और जून तक वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रही थी, उन ट्रेनों में अब सीटें खाली हो गई हैं और आसानी से टिकट उपलब्ध है। पुष्पक जैसी वीआईपी ट्रेन जिसमें दस वेटिंग तक क्लियर नहीं हो पाती थी, उस ट्रेन में इस समय चार्ट बनने से पहले ही सौ वेटिंग तक क्लियर हो रही है।
मुंबई जैसे रूट पर यात्रा में सीट के लिए जहां मारामारी मचती थी, उस रूट पर इस समय किसी भी ट्रेन में सीट उपलब्ध है। लगभग सभी ट्रेनों की वेटिंग लिस्ट कन्फर्म हो रही है। जनरल कोच भी खाली चल रहे हैं। कई कोचों में इक्का दुक्का यात्री ही दिखाई दे रहे हैं। झांसी मंडल के सीनियर डीसीएम डा. जितेंद्र कुमार ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में यात्री टिकट रद्द करा रहे है। ऐसे में टिकट काउंटर पर कैश की किल्लत हो जाती है। एक दूसरे काउंटर से मैनेज किया जा रहा है। साथ ही यात्रियों को कोरोना को लेकर जागरूक किया जा रहा है। कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने के उपाय भी किए जा रहे हैं।
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कितने टिकट बने और कितने हुए कैंसिल
14 मार्च को 277 टिकट बने 70 कैसिंल, 15 मार्च को 132 टिकट बने 18 कैसिंल, 16 मार्च को 227 टिकट बने 57 कैंसिल, 17 मार्च को 157 टिकट बने 42 कैंसिल, 18 मार्च को 160 टिकट बने 59 कैंसिल और 19 मार्च को 113 टिकट बने और 70 कैंसिल हुए।
जनरल टिकट बुकिंग में भी गिरावट
उरई। जनरल टिकट बुकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है। आम दिनों में रोजाना लगभग चार से पांच लाख तक की बुकिंग होती है। लेकिन पिछले पांच दिनों से टिकट बुकिंग में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। 14 मार्च को 3.70 लाख के टिकट बिके, 15 मार्च को 3.90 लाख के टिकट बिके, 16 मार्च को 3.20 लाख टिकट बिके, 17 मार्च को 3.10 लाख, 18 मार्च को 2.40 लाख के टिकट बिके। जबकि 19 मार्च को दोपहर दो बजे तक मात्र 80 हजार की टिकट बिक्री हुई थी।
स्टेशन पर नहीं दिखाई दे रही चहल-पहल
उरई। स्टेशन पर सन्नाटे की स्थिति है। वैसे तो रोजाना चार से पांच हजार यात्री झांसी, कानपुर, लखनऊ के अलावा मुंबई, गुजरात, दिल्ली, गोरखपुर, दक्षिण भारत के शहरों की ओर यात्रा करते हैं। इसके चलते यहां दिन रात चहल पहल रहती है, लेकिन पिछले पांच दिनों से स्टेशन परिसर में उस तरह की चहल पहल नहीं दिखाई दे रही है। कर्मचारी भी सन्नाटे की स्थिति में है। ट्रेनें जरूर आ जा रही है लेकिन यात्री नहीं दिखाई दे रहे हैं।
प्लेटफार्म टिकट 50 का
उरई। रेल प्रशासन ने स्टेशनों पर भीड़भाड़ रोकने के लिए प्लेटफार्म टिकट की कीमत भी दस रुपये से बढ़ाकर पचास रुपये कर दी है। इसके बावजूद आज पहले दिन एक भी टिकट नहीं बिका। पीआरओ का कहना है कि यह बढ़ोतरी किसी को परेशान करने के लिए नहीं है, बल्कि स्टेशन पर यात्रियों के साथ आने वाली लोगों की भीड़भाड़ रोकने के लिए है। यह बढ़ोतरी फिलहाल 15 अप्रैल तक के लिए की है।

ट्रेन में खाली पड़ी सीटें- फोटो : ORAI

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