उरई/कोंच/जालौन/कुठौंद। कहते हैं, हार नहीं मानने वालों की जीत जरूर होती है।
जिले के तीन होनहारों ने इस बात को सिद्ध कर युवाओं को भी हार नहीं मानने की पेरणा दी हे। यूपीपीसीएस की परीक्षा में पास होकर जिले के दो युवा अब एसडीएम बनकर सफलता के ये फार्मूले लोगों और खासतौर पर युवाओं को बताएंगे।
जालौन ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम उदोतपुरा निवासी शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रणी कर्मचारी रहे गंगाराम दोहरे ने बताया कि बेटा विनोद विनोद ने प्रारंभिक शिक्षा प्राइमरी और स्कूल उदोतपुरा से प्रारंभ की। प्राइवेट सेक्टर में जॉब की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद कमजोर नहीं पड़ा और निजी सेक्टरों में जॉब कर चौथी कोशिश में साक्षात्कार भी निकाल लिया।
वहीं महेबा ब्लॉक के सरसई निवासी नासिर की पीसीएस की परीक्षा में 30वीं रैंक आई। बड़े भाई इलियास ने बताया कि नासिर ने प्राइमरी की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। इंटरमीडिएट की पढ़ाई जीआईसी में की। डिग्री कॉलेज में स्नातक के बाद उन्होंने एयरफोर्स में भी जॉब की, बीआरएस लिया। उसके बाद आईडीबीआई बैंक में पीओ बने। बिना कोचिंग के पीसीएस की तैयारी की और चौथी कोशिश में सफल हुए। कुठौंद ब्लाक के ग्राम खेड़ा मुस्तकिल निवासी सोबरन सिंह ने बताया कि बेटा देशराज ने 39वीं रैंकर हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।
पीसीएस नासिर ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग से टिप्स लिए। स्वयं नोट्स बनाए। उन्होंने पीसीएस और आईएएस के साथियों से बातचीत करके नोट्स तैयार किए। घर में पढ़ाई की और चार कोशिशों के बाद सफलता प्राप्त कर ली। कई बार ऐसा हुआ कि लगा कि अब नहीं होगा, लेकिन रीस्टार्ट किया और आज एसडीएम बन गया हूं।
पीसीएस विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें तीसरी बार की कोशिश में सफलता मिली। कभी भी आर्थिक कमजोरी जीत के आगे रुकावट नहीं बनती है। सिर्फ लक्ष्य तय होना चाहिए। उसे हासिल करने की प्रक्रिया के प्रति जागरूक होना चाहिए। उस माहौल में स्वयं को हर पल रखना चाहिए और हर संभव कोशिश होनी चाहिए कि वह किस तरह से खुद को बेहतर कर सकते हैं।
पीसीएस देशराज ने बताया कि लक्ष्य के प्रति एकाग्रता और दृढ़ता ही सफलता दिलाती है। उन्होंने अपने लक्ष्य को समझ लिया था। उसको पाने के लिए पक्रिया में अटल रहे। हर पल अपनी सफलता को आसान करने की खोज करते थे। परीक्षा दी और फिर साक्षात्कार में उनकी कोशिश कामयाब हुई। अब वह औरैया में अपने परिवार के साथ रहते हैं।