16 साल पुराने मामले में फैसला, एक आरोपी की सुनवाई के दौरान हो चुकी है मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। करीब 16 वर्ष पहले हत्या का फर्जी मुकदमा दर्जा कराकर निर्दोष लोगों को फंसाने की साजिश रचने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषियों को अलग-अलग धाराओं में तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 27-27 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले के चौथे आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो जाने से उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
11 नवंबर 2010 को शत्रुघ्न सिंह ने कोतवाली जालौन में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पुत्र लाली उर्फ भूपेंद्र सिंह पर गांव के कुछ लोगों ने तमंचे से फायर कर हत्या का प्रयास किया है। इस तहरीर के आधार पर कई लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस विवेचना में पूरा मामला फर्जी और सुनियोजित साजिश निकला। जांच में सामने आया कि निर्दोष लोगों को फर्जी मुकदमे में फंसाने के उद्देश्य से पूरी कहानी गढ़ी गई थी। इसके बाद पुलिस ने शत्रुघ्न सिंह, लाली उर्फ भूपेंद्र सिंह, घनश्याम सिंह और ज्वाला सिंह उर्फ शीलू के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने लाली उर्फ भूपेंद्र सिंह, घनश्याम सिंह और ज्वाला सिंह उर्फ शीलू को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।