जालौन/आटा। बुंदेलखंड पैकेज से बनीं साढ़े पांच करोड़ की लागत की तीन मंडियां वीरान पड़ी हैं।
यहां किसान और व्यापारी नजर नहीं आते हैं। जंगली क्षेत्र और वीरान रास्ता, यहां से गुजरकर अपनी मेहनत की फसल को मंडी तक पहुंचाने से किसान कतरा रहे हैं। उन्हें गांव के नजदीक बनी मंडी से ज्यादा सुगम रास्ता 30 किलोमीटर की दूरी का लग रहा है। यहां बात जालौन की पहाड़पुरा और कदौरा ब्लॉक की भदरेखी और परासन की ग्रामीण मंडियों की हो रही है।
इन्हें सरकार ने करीब 10 साल पहले बनाकर तैयार तो कर दिया, लेकिन वहां तक किसानों को पहुंचने की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ये मंडियां जंगली क्षेत्र में हैं और वहां तक पहुंचने का रास्ता सुनसान है। फसल बेचने के लिए ट्रांसपोर्ट से लेकर बिक्री की राशि के साथ घर तक सुरक्षित पहुंचने में खतरा लग रहता है।
परासन मंडी का निर्माण 2010-11 में 2.09 करोड़ रुपये से हुआ था। एक चेकपोस्ट और कार्यालय है, चार दुकानें बनीं हैं। करीब 100 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम है। पानी की टंकी भी नहीं है। करीब दो साल पहले एक किसान अपनी फसल लेकर मंडी गया था, लेकिन दुर्दशा देख लौट गया और 30 किलोमीटर दूर कालपी मंडी चला गया। इसी वजह से अन्य किसान भी इस मंडी की ओर रुचि नहीं दिखा पाए और कालपी मंडी की ओर ही जाना उन्होंने ठीक समझा।
भदरेखी मंडी का निर्माण 2012-13 में 1.94 करोड़ की लागत से हुआ था। चार दुकानें, एक कांटा, टिनशेड, 100 मीट्रिक टन का एक बड़ा गोदाम व गार्ड रूम बना हुआ है। यहां भी पानी की टंकी नहीं है। मंडी में किसान या व्यापारी नहीं आ रहे हैं। निर्माण के सामान रखे हैं। यहां गंदगी और मवेशियों का डेरा है। मंडी जंगल क्षेत्र में होने की वजह से किसान इस मंडी में जाने से कतराते हैं। मंडी पहुंचने की असुविधा के कारण वे 30 किलोमीटर दूर कालपी मंडी का रास्ता तय करना आसान समझ रहे हैं।
ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (एएमएच) से किसानों को सहूलियत देने के लिए 2012-13 में पहाड़पुरा गांव में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से ग्रामीणों के लिए मंडी बनाई गई। मंडी में टिनशेड, नीलामी चबूतरा, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, चार दुकानें, ऑफिस व कर्मचारियों के लिए आवास बने। मंडी में किसान के न पहुंचने की वजह मंडी का मुख्य सड़क से करीब तीन किमी अंदर होना है। सिंगल लेन सड़क होने की वजह से बड़े वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। लिहाजा इन अड़चनों से बचने के लिए किसान जालौन नगर की मंडी में जाना ज्यादा सही समझते हैं।
-परासन गांव के किसान सुनील तिवारी ने बताया कि मंडी की दूरी और स्थान किसानों की सुविधा के अनुसार होना चाहिए था। फिर भी यदि वहां ये मंडी बना दी गई है तो भी ट्रांसपोर्ट आदि की सुविधा देनी चाहिए। मंडी चालू होनी चाहिए। सबसे ज्यादा इस रूट पर ट्रांसपोर्ट को लेकर दिक्कत होगी।
-भदरेखी गांव के किसान खलीक मास्टर ने बताया कि मंडी चालू हो जाएगी तो सुविधा मिलेगी। फसल बेचने की लंबी दूरी खत्म होगी और नजदीक ही यह सुविधा मिल सकेगी, लेकिन वहां पुलिस तैनाती आवश्यक होगी। मंडी में फसल बेचकर आ रहे किसान को सुनसान और जंगली क्षेत्र में अपराध का डर बना रहेगा।
-भदरेखी-परासन मंडी सचिव आंनद गुप्ता ने बताया कि परासन मंडी की टूटी हुई बाउंड्री को ठीक करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। दोनों मंडियों की साफ-सफाई कराकर बबूल के पेड़ों को जल्द कटवा दिया जाएगा।
-नवीन गल्ला मंडी में तैनात मंडी सचिव वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पहाड़पुरा मंडी में स्टाफ की कमी है। स्टाफ की मांग के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। स्टाफ की तैनाती होने पर ग्रामीण अवस्थापना केंद्र को चालू करा दिया जाएगा।
-पहाड़पुरा गांव के प्रधान प्रतिनिधि नरेंद्र पाल ने बताया कि किसानों के हित को देखते हुए मंडी बनी थी, लेकिन उसे चालू ही नहीं कराया जा सका है। इस वजह से किसान जालौन नगर में जाने को मजबूर हैं। कई बार इस मंडी को चालू कराए जाने की मांग की जा चुकी है, जिससे किसानों को नजदीक ही फसल बेचने की सुविधा मिले।