उरई। महिला कल्याण विभाग ने मिशन शक्ति के तहत जिला अस्पताल में जन जागरूकता कार्यक्रम किया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण अधिनियम के प्रावधानों के बारे में एसीएमओ एवं पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद भूषण एवं सीएमएस डॉ. अनिल राज की अध्यक्षता में बैठक हुई।
एसीएमओ ने पीसीपीएनडीटी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अब हमें बेटी और बेटे में भेदभाव नहीं करना हैं। बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं है। अगर किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग की जांच होते हुए पाई जाती है तो ऐसे में तीन वर्ष की कैद हो सकती है और दस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
सेंटर मैनेजर अंजना यादव ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान 2015 में शुरू किया गया था। जिसका उद्देश्य लिंग आधारित चयन पर रोकथाम, बालिकाओं के अस्तित्व व सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। बालिकाओं के लिए शिक्षा व जागरूकता का प्रचार प्रसार करना है। इस दौरान वन स्टॉप सेंटर से प्रवीणा यादव, मिलन पांचाल, रचना आदि मौजूद रहे।