उरई। डेढ़ साल पहले करीब तीन करोड़ के टेंडर कर उन्हें अनुमानित दर पर स्वीकृत करने की शिकायत पर शासन ने संज्ञान लिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि पालिकाध्यक्ष ने अपने निजी लाभ के लिए अनुमानित दर पर टेंडर गुपचुप तरीके से किए थे, जिससे लाखों रुपये की राजस्व हानि हुई। शिकायत के डेढ़ साल बाद इसकी सुनवाई लखनऊ में हो रही है। लेकिन शिकायतकर्ता के मृत हो जाने के कारण यह मामला कमजोर हो गया।
शहर के जालौन रोड निवासी मृतक सिद्धू शिवहरे ने अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर 2023 में तीन महीने लगातार जिले से लेकर शासन, मंत्री, और कोर्ट तक उरई नगर पालिका में तीन करोड़ के हुए कामों की शिकायत की थी। आरोप था कि नगर पालिका ने जुलाई-अगस्त 2023 में करीब तीन करोड़ के टेंडर कर काम करवाए थे। इसमें लाखों रुपये की राजस्व क्षति हुई थी। टेंडर को अनुमानित दर पर उन चहेते ठेकेदारों को दे दिया गया था, जो अध्यक्ष के करीबी थे। अन्य ठेकेदारों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।
आरोप था कि अनुमानित दर पर टेंडर करके लाखों रुपये राजस्व की हानि हुई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि टेंडर प्रक्रिया में सभी ठेकेदारों को भाग लेने का मौका मिलता, तो बोली लगाई जाती और टेंडर कम दर पर होते। इससे नगर पालिका को लाखों रुपये का राजस्व मिलता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके साथ ही कई आरोप लगाए गए थे, जैसे—जो काम पहले ही हो चुके थे, उनके नाम पर भी टेंडर लगा दिए गए और कई काम गुणवत्ता विहीन थे।
इन आरोपों को लेकर सिद्धू शिवहरे ने डीएम से लेकर मंत्री और सचिव तक शिकायत की थी। इस मामले में शासन ने कई बार जांच के लिए पत्र भेजे। 20 दिसंबर 2023 को इन्हीं आरोपों को लेकर नगर पालिका ईओ विमला पति पर कार्रवाई हुई थी और उन्हें हटा दिया गया था। तत्कालीन डीएम चांदनी सिंह से भी इसकी शिकायत की गई थी। इसके बाद ईओ के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी गई थी। अब 11 दिसंबर को नगर पालिका ईओ को शासन ने तलब किया है और आरोपों पर अपना पक्ष रखने को कहा है।
नगर पालिका की हुई थी कई शिकायतें
जालौन रोड निवासी शिकायतकर्ता सिद्धू शिवहरे की मौत 27 मार्च 2024 को हो गई थी। इससे पहले उन्होंने करीब चार महीने तक लगातार नगर पालिका की कई बिंदुओं पर शिकायत की थी। इनमें खराब वाहनों को सही करके डीजल की चोरी, घटिया कंपनी के बल्ब लगाकर लाखों का बजट खर्च करना, कई कामों को पूरा होने के बाद भी उनके नाम पर बजट खर्च करना, और ODA के काम को अपना बताकर बजट निकाल लेना शामिल था। सिद्धू शिवहरे ने इन आरोपों को लेकर आधा दर्जन मंत्रियों और कई सचिवों से शिकायत की थी। इस मामले में कई बार जांच को लेकर पत्र आए, जिससे पालिकाध्यक्ष काम करने से कतराने लगे। लेकिन शिकायतकर्ता की मौत के बाद आरोप कमजोर हो गए और जो सबूत थे, वे भी खत्म हो गए। (संवाद)
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जिन आरोपों को लगाकर शिकायत की गई थी, उन्हें लेकर शासन से पत्र आया है। हमने अपना जवाब तैयार कर लिया है। लेकिन आरोप बेबुनियाद हैं। शिकायतकर्ता मृत हो चुका है। नगर पालिका का पक्ष शासन के समक्ष रखा जाएगा। -राम अचल, ईओ, नगर पालिका
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निक्षेपित करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। सभी आरोप बेबुनियाद हैं। इसमें किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं पाया गया है। शिकायतकर्ता की कुछ महीनें पहले मौत हो चुकी है। अब किसी भी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है।
नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चौधरी