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Jalaun News: भाजपा में आपसी गुटबाजी से हुई वोटों में सेंधमारी

Wed, 05 Jun 2024 01:58 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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उरई। निवर्तमान सांसद भानु प्रताप वर्मा का सांसद बनने के बाद लोगों से कम मिलना भारी पड़ा। लेकिन पार्टी के अंदर चल रही अंदरूनी कलह और गुटबाजी को वह नहीं तोड़ पाए और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। पांच बार के सांसद होने के बाद भी वह लगातार तीसरी बार हैट्रिक मारने में चूक गए। इसमें सबसे बड़ी वजह पार्टी के अंदर खाने में चल रहा उनका विरोध था। लोगों का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधि उनके साथ चुनाव प्रचार में जाते थे, लेकिन अंदर से वह निष्क्रिय बने रहते थे। कार्यकर्ताओं की यही उदासीनता और आपसी कलह भाजपा के लिए हार का कारण बनी। लोगों का कहना है कि अगर जिले के नेता ईमानदारी से कार्य करते तो शायद वह छठवीं बार सांसद बन जाते। (संवाद)
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मंत्री रहते हुए लोगों को नहीं कर पाए संतुष्ट, दिखा विरोध
उरई। पांच बार के सांसद भानु प्रताप वर्मा को जब मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली थी तो जिले के लोगों को उम्मीद थी कि अब जिले का कायाकल्प होगा। लेकिन मंत्री होने के बाद भी वह जिले की मूलभूत समस्याओं को दूर नहीं कर पाए। जिससे उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। कई जगह चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें विरोध झेलना पड़ा। लोगों का कहना था कि सांसद व मंत्री होने के बाद भी वह एक भी बार नहीं आए। इस बार चुनाव में लोगों ने कई जगह उन्हें बुलाने का भी प्रयास किया। लेकिन वह नहीं पहुंच पाए। चुनाव के दौरान कई जगह चुनाव बहिष्कार के दौरान भी लोग अपने सांसद को बुलाने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन वह आश्वासन देने भी नहीं पहुंचे। यहीं सब कुछ चुनाव में उनके लिए घातक साबित हुआ। (संवाद)


केंद्रीय मंत्री ने नहीं समझा स्थानीय मुद्दों का मर्म
उरई। लोकसभा चुनाव की तारीख एलान होने के पहले ही सभी पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए भाजपा चुनाव प्रचार में लगी थी। तारीखों का एलान हुआ तो भाजपा के अधिकतर नेता मोदी लहर होने की बात कहकर जीत दर्ज करने की बात कह रहे थे। जिससे वह चुनाव प्रचार में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। लोगों का कहना है कि भाजपा का अति उत्साह ही हार का कारण बना। मतदाताओं के मन में स्थानीय मुद्दों की उपेक्षा की लगी चिंगारी ऐसी भड़की, जिसकी वजह से भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। (संवाद)
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अखिलेश के मतगणना स्थल पर सतर्क रहने के ट्वीट पर जमे रहे सपा के एजेंट
उरई। मतगणना शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी व गठबंधन के प्रत्याशी नारायणदास अहिरवार के मतगणना एजेंट पहुंचने लगे थे। जहां सभी पार्टियों के एक एक एजेंट थे, तो वहीं समाजवादी पार्टी ने अपने एजेंटो को बैकअप में बाहर रखा था। जिससे किसी विशेष परिस्थिति में उन्हें लगाया जा सके। अखिलेश के आदेश से उनके कार्यकर्ता व नेता मतगणना शुरू होने से लेकर आखिरी तक डटे रहे। (संवाद)


बसपा के वोटबैंक के बिखराव ने लगा दी सपा की नैया पार
उरई। अबकी बार चार सौ पार के नारे के साथ भाजपा जिले में अपने चुनावी प्रचार को कर रही थी। वहीं, चुनावी चर्चाओं में भी भाजपा प्रत्याशी की मजबूत स्थिति मानी जा रही थी। यह माना जा रहा था कि बसपा जितना अच्छा लड़ेगी गठबंधन प्रत्याशी का नुकसान करेगी। मतदान की तारीख तक बसपा के प्रत्याशी का चुनाव नजर ही नहीं आ रहा था। नतीजा यह हुआ कि बसपा का वोट गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में खिसक गया। जिसकी वजह से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी नारायण दास अहिरवार ने जीत दर्ज कर ली। (संवाद)
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