जालौन। रेलवे स्टेशन और ट्रैक लाइन की मांग कर रहे ग्रामीणों की उम्मीदें भी दम तोड़ने लगी हैं।
आठ साल पहले रेलवे ट्रैक को लेकर सर्वे हुआ, लेकिन उसके बाद फाइलों में ही इसे ढक दिया गया। इस वजह से क्षेत्रीय लोग अब बड़े आंदोलन का मन बना रहे हैं। हस्ताक्षर अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मांग को प्रधानमंत्री तक पहुंचा रहे हैं।
आजादी के बाद से अभी तक जालौन नगर रेलवे लाइन से वंचित रहा है। आजादी के बाद प्रथम रेलमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने जालौन नगर में आकर नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने का आश्वासन दिया था। बाद में ममता बनर्जी के कार्यकाल में रेलवे लाइन का सर्वे भी कराया गया। समाजसेवी अखिलेश लाक्षाकार, देवीदयाल वर्मा आदि भी लगातार नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने की मांग उठाते रहे। इस बार अखिलेश लाक्षाकार ने मुहिम चलाकर नगरवासियों के हस्ताक्षर युक्त मांगपत्र प्रधानमंत्री को भेजा है।
कहा गया कि पूर्व में कोंच से फफूंद वायां जालौन 89.66 किमी एवं महोबा से भिंड वाया जालौन 217 किमी रेलवे लाइन का सर्वे भी हो चुका है। बजट के अभाव में अभी तक रेल लाइन का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। वर्ष 2016 में नगर की जनता ने क्रमिक अनशन के साथ ही आमरण अनशन किया था। तब आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन अभी तक यह कोरा आश्वासन ही साबित हुआ है।
रेल आंदोलन से जुड़े गौरीश द्विवेदी, देवीदयाल वर्मा, मनोज रिछारिया, शामीर अली, सोमिल याज्ञिक व गजेंद्र सिंह सेंगर आदि ने नए बजट में रेलवे लाइन के लिए बजट उपलब्ध करवाने की मांग को सोशल मीडिया के प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रधानमंत्री व रेलमंत्री को पहुंचाया है।