उरई। जालौन सीट की दावेदारी अपना दल की झोली में जाती देख भाजपा के कई कद्दावर नेताओं ने पाला बदलने तक का मन बना लिया है।
भाजपा का दामन छोड़ने को तैयार एक जिला स्तरीय जनप्रतिनिधि लुभावने प्रस्ताव लेकर एनडीए के इस घटक दल के हाईकमान के पास भी पहुंच चुके हैं। हालांकि अभी उनकी दाल गली नहीं है। पार्टी अपनी मंशा के अनुसार पार्टी के ही व्यक्ति को टिकट देने का मन बना चुकी है। फिलहाल, कुछ और कद्दावर नेता भी दल बदलकर टिकट की दावेदारी के प्रयास में जुट गए हैं।
बुंदेलखंड में सीट मांग रहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल तीन जनवरी को आयोजित सावित्रीबाई फुले जयंती में पहुंची थीं। वहीं से जालौन सीट पर अपना दल की दावेदारी के संकेत मिलना शुरू हो गए थे। दावेदारी की तैयारी भी इस पार्टी ने शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा नेताओं में खलबली है। टिकट पाने के लिए अब वे भाजपा हाईकमान को छोड़कर एनडीए के इस घटक दल के हाईकमान से संपर्क करने लगे हैं। अपना दल के ही एक प्रदेश स्तरीय वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि जिले के भाजपा से जिला स्तरीय जन प्रतिनिधि टिकट की दावेदारी के लिए हाईकमान से मिलने दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने टिकट के लिए हर संभव और हर जतन के साथ अपनी मजबूती पेश की।
हालांकि उनकी बात सुनी गई, लेकिन कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। इससे मायूस लौटे इन जनप्रतिनिधि ने और राजनीतिक हथकंडे तैयार करने शुरू कर दिए हैं। इसी तरह भाजपा के और भी कई वरिष्ठ नेता हैं, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल व उच्च पदाधिकारियों से संपर्क करने में लगे हैं। हालांकि जिस तरह की तैयारी अपना दल की चल रही है, वह अपनी ही पार्टी के किसी चर्चित और सम्मानजनक छवि के नेता को टिकट के लिए खोज रही हैं। ऐसे में दलबदलू की भूमिका बना रहे भाजपा के उन नेताओं की दाल गल पाना मुश्किल लग रहा है।
बुंदेलखंड प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस जिले में खुद को दाखिल करने की तैयारी में जुटी अपना दल जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को बुलाने के लिए जनसभा कराने की योजना बना रहे हैं।
चुनाव से पहले तक करीब आधा दर्जन तक जनसभा प्रस्तावित की जा सकती हैं। ये सभाएं विशेष मौकों पर होंगी। मुद्दा, क्षेत्र की समस्याओं का होगा। जिन्हें पूरा करने के कई दावे मंच से अनुप्रिया पटेल द्वारा किए जा सकते हैं। एक पदाधिकारी ने बताया कि सर्वे शुरू कर दिया है। जो बड़े और लंबे समय से अटके मुद्दे होंगे, उन्हीं की सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए हर गांव स्तर से बड़े बुजुर्गों और समाज सेवियों से संपर्क कर स्थितियों को समझा जाएगा।