चार नवंबर को उरई जालौन में जन्मी देश की पहली और सबसे वजनी नार्मल डिलीवरी से पैदा हुई बच्ची की सांसे गुरुवार सुबह छह बजे थम गईं। बच्ची की मौत उसके घर पर ही हुई। इस मौत से परिजन शोकाकुल हो उठे। मां फिरदौस का रो रोकर बुरा हाल है।
गौरतलब है कि कदौरा ब्लाक के गुलौली गांव निवासी फिरदौस ने चार नवंबर बुधवार को उरई के एक नर्सिंग होम में नार्मल डिलीवरी से एक 6.7 किलो की बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी कराने वाली डॉ. अंजना गुप्ता ने तब इसे देश ही नहीं विश्व की पहली नार्मल डिलीवरी से हुई सबसे वजनी बच्ची बताया था।
हालांकि उस दौरान उन्होंने बच्चे के फेफड़े और पेट में दिक्कत होने की बात भी कही थी। जन्म के करीब तीन घंटे बाद बच्ची के श्वांस नली में इन्फेक्शन होने के चलते उसे झांसी के एक नर्सिंग होम के लिए रेफर कर दिया गया। यहां डॉ. प्रमोद गुप्ता की देखरेख में बच्ची का इलाज चला।
बुधवार को करीब 15 दिन के बाद बच्ची के नार्मल होने पर परिजन उसे अस्पताल से लिवा ले गए। हालांकि डॉ. प्रमोद के अनुसार अभी बच्ची को एक दो दिन और नर्सिंग होम में रखने की परिजनों को सलाह दी गई थी जिसे परिजनों ने नहीं माना। परिजन बच्ची को स्वस्थ्य देखकर उसे घर ले जाने की जिद करने लगे।
बुधवार को वे बच्ची को घर ले भी आए। पर रात में एकाएक बच्ची की हालत बिगड़ गई और सुबह छह बजते बजते उसकी सांसे थम गईं।
इस बाबत डॉ. अंजना गुप्ता ने बताया कि बच्ची को डिस्चार्ज करते समय उसकी हालत सामान्य थी। उसे किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं थी। हो सकता है रात में झांसी से घर लाते वक्त उसे ठंड लग गई हो। इससे उसकी मौत हो गई।