लंबे इंतजार के बाद शनिवार को मौसम ने यकायक करवट ले ली है। मौसम बदलने से
उम्मीद बढ़ गई है। जहां एक तरफ किसानों को एक बार फिर से रबी की फसल ठीक
होने की उम्मीद नजर आ रही है वहीं गरम कपड़ों के व्यापारियों के चेहरे भी
खिलते दिखे। इस बार सर्दी का आधे से ज्यादा मौसम निकल जाने के बाद भी न तो
जमकर सर्दी पड़ी और न ही
बरसात हुई। इससे सर्दी में होने वाली गेहूं की
खेती पर असर पड़ रहा है। इस मौसम में भी किसान सिंचाई की समस्या से जूझ रहा
है वहीं तापमान में पर्याप्त गिरावट न होने से इस मौसम के फल व सब्जी की
पैदावार पर भी असर पड़ रहा है। दूसरी तरफ सर्दी में बिक्री की आस लेकर गरम
कपड़ों का स्टाक करने वाले व्यापारियों की उम्मीदें लगभग टूट चुकी थीं।
ठंड
नहीं होने से गरम कपड़ों का स्टाक जस का तस पड़ा है। ऐसे में शनिवार को
अचानक मौसम पलटने से गेहूं की पैदावार बढ़ने की आस बलवती हुई है। साथ ही
कपड़ा व्यापारी भी मना रहे हैं कि कुछ दिन इसी तरह की सर्दी पड़ जाए तो
उनकी लागत सीधी हो जाए। पेश है दोनों पहलुओं को समेटती रिपोर्ट-
शनिवार सीजन का सबसे ठंडा दिन, कांपे लोग
मौसम में अचानक बदलाव के बाद सर्द हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी
हैं। शुक्रवार की रात से शुरू हुई तेज सर्द हवाओं के चलते शनिवार का दिन
सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। सुबह के समय कोहरा और फिर हवा से लोग कांप उठे।
सर्दी बढ़ने से गरम कपड़ों का बाजार गरमा गया। इससे दुकानदारों के चेहरे
खिल उठे हैं। वे मना रहे हैं कि कुछ दिन ऐसी सर्दी
पड़ जाए तो कारोबार चमक
जाए। इस वर्ष सर्दी का मौसम अजीबोगरीब रहा है। जनवरी के शुरुआती 15 दिन
मार्च जैसी गरमी रही। तेज धूप ने लोगों को सर्दी का एहसास ही नहीं होने
दिया। मकर संक्रांति पर मौसम भी अचानक बदल गया। दो दिनों से शाम होते ही
कोहरे की चादर छा जाती है और तेज सर्द हवाएं भी चलने लगती हैं। शनिवार की
सुबह भी कुछ ऐसा
ही रहा। तेज सर्द हवाओं व कोहरे ने लोगों की मुश्किलें
बढ़ा दीं। सर्दी के कारण बहुत ही कम लोग घरों से बाहर निकले। दोपहर 12 बजे
तक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर में धूप निकलने के बाद भी ठंडी
हवाओं का कहर जारी रहा। हालांकि बाजारों में धूप निकलने के बाद रौनक आ गई।
मौसम बदलते ही गरम कपड़ों के बाजार में भी गर्माहट दिखाई दी।
कई दिनों से
हाथ पर हाथ धरे बैठे स्वेटर, कोट विक्रेता ग्राहकों के साथ व्यस्त नजर आए।
गरम कपड़ों की डिमांड बढ़ने से कपड़ा विक्रेता भी खुश दिखे। वे मना रहे हैं
कि आने वाले 10-15 दिन ऐसी ही सर्दी पड़ जाए तो गरम कपड़ों में फंसा पैसा
निकलने के साथ कुछ मुनाफा भी कमा लिया जाए।
गरम कपड़ों के विक्रेता
रामशंकर ने बताया कि इस बार सर्दी के मौसम में वह काफी उम्मीदें लगाए बैठे
थे, पर उन पर पानी फिर गया। कम सर्दी से इस वर्ष गरम कपड़ों की बिक्री कई
गुना कम रही। हालांकि पिछले दो दिनों में इसमें तेजी आई
है। राकेश का कहना
है कि मौसम ऐसा रहा तब तो ठीक है वर्ना इस बार नुकसान बहुत है। वैसे तो
सर्द मौसम का ज्यादा दिन तक रहने की उम्मीद नहीं है। इसलिए इस वर्ष गरम
कपड़ों के विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ेगा।
फसलों में आई जान, खुश हुए किसान
सर्दी के मौसम में गर्मी के चलते रबी फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे किसान परेशान थे लेकिन उनकी यह परेशानी मकर संक्रांति पर मौसम के करवट लेने से दूर होती नजर आ रही है। मौसम में ठंडक आने से मटर, मसूर समेत अन्य फसलों के फूल गिरने से रुकेंगे और गेहूं में किल्ले भी अधिक निकलेंगे। इससे किसान खुश हैं।
गौरतलब है कि जनवरी माह में भी तापमान में ज्यादा चल रहा था। 20 डिग्री सेल्यिस से अधिक तापमान रहने की वजह से रबी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं। किसान पानी का छिड़काव फसलों पर करवा रहे थे। इसके बावजूद फसल में नुकसान दिख रहा था। 15 जनवरी से मौसम में आए बदलाव के बाद किसानों के चेहरे खिल गए हैं। कृषि उप निदेशक
अनिल कुमार पाठक और कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार की मानें तो मौसम के बदलने से फसलों को संजीवनी मिल गई है। गर्मी की वजह से जमीन की नमी कम हो रही थी। अब ठंडक होने जमीन में नमी बनी रहेगी। इसका सीधा लाभ फसलों को मिलेगा। मौसम बदलने से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा मिलने क ी उम्मीद है। क्योंकि गेहूं के किल्ले
निकलते वक्त अगर तापमान कम रहता है तो वह अधिक संख्या में निकलते हैं। इससे उत्पादन अधिक होता है। इसके अलावा मटर, मसूर, चना के फूल गर्मी होने की वजह से गिर रहे थे। वह अब रुक जाएंगे। ठंडा मौसम हर लिहाज से किसानों के लिए फायदेमंद है। किसान अशोक सिंह का कहना है कि जनवरी माह में तो मौसम और ठंडा होना चाहिए। तभी फसलों को फायदा होता है।