सावन के तीसरे सोमवार को शहर में भक्ति की रसधारा बह उठी। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों के सैलाब व भगवान शिव के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान भक्तों ने शिवलिंग का अभिषेक कर मुरादें मांगीं। सावन के तीसरे सोमवार पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर के विभिन्न हिस्सों में सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी लंबी
कतारें देखी गईं। भगवान शिव के तीसरे स्वरूप की उपासना के लिए सावन का तीसरा सोमवार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना करने पर भक्तों को मनवांछित फल प्राप्त होता है। सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव के तीन स्वरूपों की पूजा की गई। ज्योतिषों के अनुसार इस सष्टि में तीन
गुण हैं सत, रज और तम। इन तीन गुणों को मिलाकर ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। इस पर स्वयं भगवान शिव संचालन करते हैं। भगवान शिव के नीलकंठ, नटराज व मृत्युंजय इन तीन स्वरूपों की विशेष आराधना की गई। शिव भक्तों ने दूध, दही, घी, शक्कर व गंगाजल के पंचामृत से भगवान शिव को स्नान कराया। इसके बाद उन पर चंदन, फूल, फल, सुगंध, रोली,
बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पण किया। इस मौके पर शहर के करमेर रोड स्थित हुल्की माता मंदिर, टाउन हॉल स्थित सिद्ध महाकालेश्वर मंदिर, ठड़ेश्वरी मंदिर आदि मंदिरों पर भक्तों की अपार भीड़ रही।
भूतनाथ महाराज, हुआ अभिषेक
सावन के तीसरे सोमवार को शिव मंदिर और शिवालय हर हर महादेव की स्वर गूंज उठे। भगवान भूत भावन को प्रसन्न करने के लिये भक्तों ने उनकी विधि विधान से पूजा अर्चना की। हर हर महादेव, बोल बम के जयकारों ने वातावरण को शिवमय बना दिया था। आशुतोष भगवान भोले शंकर के मंदिरों में महिलाओं द्वारा जलाभिषेक किया गया, धूप दीप नैवेद्य उन्हें
समर्पित किये। चंदकुआ पर भूतेश्वर महादेव मंदिर पर उनकी भव्य झांकी सजाई गई। महाकालेश्वर मंदिर में भी महिलाओं की भारी भीड़ रही, नईबस्ती के सिद्धेश्वर हादेव, भगवान मारकंडेयश्वर, बक्शेश्वर, गुप्तेश्वर आदि मंदिरों में भी सुबह से ही जलाभिषेक के लिये भारी भीड़ रही।