कोंच में छलनी से चंद्रमा को अर्घ्य देती सुहागिनें।
- फोटो : अमर उजाला
100 साल बाद अद्भुत संयोग वाले करवा चौथ पर अखंड सौभाग्य के लिए जिले भर में सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। सोलह शृंगार किए महिलाओं ने चांद का दीदार कर माता गौरी और भगवान गणेश का पूजा अर्चन कर पति के लिए लंबी आयु मांगी। घर में भजन कीर्तन कर महिलाएं पूरे दिन भक्तिभाव से सराबोर रही। शाम के समय बच्चों ने आतिशबाजी
छुड़ाई। बुधवार को जिले भर में करवा चौथ का त्योहार मनाया गया। पूरे दिन सुहागिनों ने बिना कुछ खाए पिए उपवास रख पर्व की पौराणिक कथाओं को सुना। ढोलक, मंजीरा के साथ भजन कीर्तन हुए। पूरे दिन घर में भक्ति की रसधारा बहती रही। दिन ढलते ही उपवास रखे महिलाओं ने सोलह शृंगार किया और फिर चांद के निकलने पर चलनी से दीदार किया। जल
अर्पित कर आरती उतारने के बाद पति की भी आरती उतारी। चांद को अर्घ्य देने के पहले करवा चौथ व्रत की कथा सुनी। इसके बाद मां गौरी और भगवान गणेश का पूजा अर्चन किया। उपवास रखे महिलाओं ने सदा सौभाग्यवती रहने की कामना के साथ परिवार की खुशहाली के साथ संतान सुख की कामना की। पतियों ने उपहार भेंट किए।
जालौन प्रतिनिधि के अनुसार कार्तिक मास की चतुर्थी के दिन नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत रखा गया। यहां भी महिलाओं ने सुबह से ही घरों की सफ ाई करके घर की छत को गाय के गोबर से लीपकर उस पर चौक पूर कर गौरी गणेश की प्रतिमा रखकर पूजन किया। देर शाम चंद्रमा के दर्शन व पूजन के बाद महिलाओं ने अपने
पति व परिवार के बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। कोंच प्रतिनिधि के अनुसार करवा चौथ व्रत को लेकर सुहागिनें सुबह से ही तैयारियों में जुट गई थीं और पूरे दिन उन्होंने व्रत रख कर अनुष्ठान किया। चंद्रोदय होते ही आतिशबाजी छुड़ाई गई। चंद्र दर्शन के बाद पूजन कर महिलाओं ने पतियों के लिए लंबी आयु की कामना की।